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उदयपुर में पकड़े गए अमोनियम नाइट्रेट के सौदागर अविनाश बाहेती की रिमांड अवधि बढ़ाई

1500 ट्रक अमोनियम नाइट्रेट की हेराफेरी का मामला

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ACCUSED AVINASH BAHETI

उदयपुर. करीब 15 सौ ट्रक अमोनियम नाइट्रेट के अवैध परिवहन के मामले में धरे गए मुख्य सरगना अविनाश बाहेती को पुलिस ने रिमांड अवधि समाप्त होने के बीच शुक्रवार को अदालत में पेश किया, जहां से उसकी पुलिस अभिरक्षा अवधि 4 दिन के लिए बढ़ा दी गई। पुलिस की ओर से अदालत में तर्क देकर आरोपित की रिमांड अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी। गौरतलब है कि आरोपित पर 15 सौ ट्रक में अमोनियम नाइट्रेट की हेराफेरी कर अनजान हाथों में बेचने जैसे कई गंभीर आरोप हैं। करीब 10 दिन पहले पुलिस ने आरोपित को इंदौर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद अदालत ने आरोपित से पूछताछ के लिए 10 दिन पुलिस रिमांड पर भेजने के आदेश दिए थे।

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पूरे राजस्थान को तबाह कर सकता है इतना विस्फोटक
एक अनुमान के मुताबिक इतनी बड़ी तादाद में गायब विस्फोटक से पूरे राजस्थान को तबाह किया जा सकता है। उदयपुर जैसे शहर के लिए तो 4 ट्रक ही काफी है। गायब ट्रकों में अमोनियम नाइट्रेट की कीमत करीब 300 करोड़ रुपए आंकी गई है। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि आरोपित के साथ उसका पिता महेंद्र बाहेती एवं अन्य परिजनों की ओर से दीपक फर्टीलाइजर से मिलीभगत कर अमोनियम नाइट्रेट का बहुत बड़े पैमाने पर कारोबार किया जा रहा है। सरकारी दर पर आरोपित प्रति किलो 35 रुपए के हिसाब से अमोनियम नाइट्रेट खरीदता था। वहीं चार गुना अधिक दामों में इसे बेच देता था। आरोपित श्री तिरूपति एंटरप्राइजेज, बालाजी ड्रिलिंग, बालाजी टे्रडर्स, जीटी सेल्स, बालाजी एंटरप्राइजेज, श्रीनाथ एंटरप्राइजेज, तिरूपति ट्रेडिंग के नाम से बनी फर्मों का सहारा लेकर दीपक फर्टीलाइजर कंपनी से बिना वैद्य अनुज्ञापत्रों के हेराफेरी करता था। पुलिस ने अनुसंधान में पाया कि बाहेती के कार्मिकों के खातों में करोड़ों रुपयों का लेनदेन हुआ है।

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बम धमाकों में हुआ था इस्तेमाल
गौरतलब है कि बीते वर्षों के दौरान देश में हुए बम धमाकों में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल हुआ है। विस्फोटक के तौर पर 76-77 फीसदी अमोनियम नाइट्रेट, 8-10फीसदी चूरा की हुई कोयले की ईंट एवं ४ फीसदी डीजल केअंश को मिलाकर किसी लोहे या हार्ड प्लास्टिक के कन्टेनर में टाइट भरकर डेटोनेटर के माध्यम से ब्लास्ट किया जाता है। भारत सरकार ने वर्ष 2011 में नाइट्रेट के लिए पृथक लाइसेंस प्रक्रिया लागू की थी।