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Rashmika Mandanna Deep Fake Video: रश्मिका मंधाना के बाद कहीं आपका डीप फेक वीडिया ना हो जाए वायरल

Rashmika Mandanna Deep Fake Video: आपने साउथ मूवी स्टार रश्मिका मंधाना के डीप फेक वायरल वीडियो को देखा होगा या फिर इस बारे में खबरें जरूर पढ़ी होंगी। कुछ दिन पूर्व इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी थी। इसके बाद एक्ट्रेस ने भी इसे फेक करार दिया और इस बारे में कड़े कदम उठाने के लिए कहा था।

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Rashmika Mandanna Deep Fake Video: आपने साउथ मूवी स्टार रश्मिका मंधाना के डीप फेक वायरल वीडियो को देखा होगा या फिर इस बारे में खबरें जरूर पढ़ी होंगी। कुछ दिन पूर्व इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी थी। इसके बाद एक्ट्रेस ने भी इसे फेक करार दिया और इस बारे में कड़े कदम उठाने के लिए कहा था।

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ये कोई पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी कई लोग इसका शिकार हो चुके हैं। अगर आप सोच रहे हैं, ये केवल सेलिब्रिटीज तक सीमित है तो आपको बता दें कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस जमाने में इस तकनीक का आप भी शिकार हो सकते हैं, ऐसे में सुरक्षित रहने के लिए कुछ ना कुछ एहतियाती कदम जरूर उठाने चाहिए, ताकि इस तरह की टेक्नोलॉजी के जाल में ना फंसें। आजकल बहुत सारे एआइ (AI) टूल मौजूद हैं, जो एआइ जनरेटेड कंटेंट को आसानी से पकड़ सकते हैं। एआइ और नॉट और हाइव मॉडरेशन जैसे कई एआइ टूल भी काम में आ सकते हैं, जो एआइ-जनरेटेड कंटेंट का पता लगा सकते हैं। डीपवेयर स्केनर एक ऐसा टूल है, जिसकी मदद से आप किसी इमेज या वीडियो को डीपफेक पता करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा भी ढेरों टूल ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

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यह है डीप फेक वीडियो या इमेज
एआई (AI) एक्सपर्ट कौस्तुभ भट्टाचार्य के अनुसार वीडियो बनाने वाले तमाम एप और वेबसाइट गूगल पर मौजूद हैं। इसमें जो तकनीक काम करती है, वह पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर निर्भर करती है। डीपफेक दो शब्दों से मिलकर बना है, पहला डीप जिसका मतलब गहराई और दूसरा फेक यानी नकली। इसके लिए कुछ इमेज या वीडियो को डीपफेक कंटेंट बनाने वाले एप में डाला जाता है और बिल्कुल असली लगने वाला नया कंटेंट तैयार कर देता है। इसमें किसी वीडियो पर अपनी तस्वीर लगा सकते हैं या किसी वीडियो पर किसी सेलिब्रिटी की तस्वीर अथवा आवाज लगाकर कंटेंट तैयार कर सकते हैं।

कानूनी तरीका कारगर, एआइ टूल का भी कर सकते हैं इस्तेमाल
भट्टाचार्य के मुताबिक, लोगों ने ’सेलिब्रिटी’ का दर्जा प्राप्त कर लिया है, उनके पास अपने व्यक्तित्व और छवि की रक्षा करने का कुछ अधिकार होना चाहिए। ऐसी परिस्थिति में ’निजता के अधिकार’ के आधार पर ’प्रचार का अधिकार’ प्रदत्त किया जा सकता है। ऐसे अधिकारों को कॉपीराइट अधिनियम 1957 की धारा 38 (कलाकार का अधिकार), 38 ए (कलाकार का विशेष अधिकार) और 38 बी (कलाकार का नैतिक अधिकार) के तहत भी उचित ठहराया जा सकता है। चाहे एआइ तकनीक का उपयोग शामिल हो या नहीं, सार्वजनिक व्यक्तित्वों की गैर-सहमति से उपयोग को चुनौती देने में भारत में कानूनी तरीका सबसे कारगर है।


3 साल की सजा और 1 लाख जुर्माना
ये वीडियो वायरल होेने के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने डीप फेक कंटेंट को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि अगर किसी को ऐसा कंटेंट बनाने और वायरल करने का दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ धोखाधड़ी जैसी धाराओं का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके लिए बाकायदा सेक्शन 66 डी में प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 3 साल की सजा और 1 लाख का जुर्माना लगाया जा सकता है।