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भीण्डर व सलूम्बर में खुुलेंगे आंचल अमृत कक्ष, प्रदेश के 25 सरकारी चिकित्सालयों में शामिल

इस कक्ष में प्रसूताओं दुग्धपान परामर्श, उपचार की सुविधा मिलेंगी।

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anchal amrit kaksh in bhinder and salumber udaipur

महेन्द्र सिंह राठौड़ /भीण्डर. स्वास्थ्य विभाग व जयपुर रीको की ओर से प्रदेश के 25 सरकारी अस्पतालों में आंचल अमृत कक्ष बनाने के तहत उदयपुर जिले के भीण्डर व सलूम्बर चिकित्सालयों का चयन हुआ है। इस कक्ष में प्रसूताओं दुग्धपान परामर्श, उपचार की सुविधा मिलेंगी।


यह जानकारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के राज्यस्तरीय सलाहकार योगगुरु देवेंद्र अग्रवाल ने भीण्डर चिकित्सालय के निरीक्षण के दौरान कही। उन्होंने बताया कि 2 करोड़ की आर्थिक सहायता से प्रदेश के 25 सरकारी अस्पतालों में बनने वाले इन कक्षों में प्रसूता को लेबर रूम से आंचल अमृत कक्ष में शिफ्ट कर पहले एक घंटे तक स्तनपान की जागरुकता, सुविधा, परामर्श, सहायता और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

दुग्धपान क्लीनिक में पारिवारिक माहौल में माताओं को शिशु को दूध पिलाने में सक्षम बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि भीण्डर एवं सलूम्बर दोनों सीएचसी के आंचल अमृत कक्षों में भंडारण और वितरण केन्द्र भी बनाया जाएगा, जिससे वहां बीमार नवजात शिशुओं को दूध उपलब्ध भी कराया जा सके। यह कक्ष आगामी छ: माह में तैयार हो जाएंगे। इन कक्षों को लेबर रूम के पास ही बनाया जाएगा। वहीं जननी के स्तनपान के लिए इलेक्ट्रिकल बेस्ट पंप, स्टरलाइजर, डीप फ्रीजर, वाटर डिस्प्रेशर, टीवी आदि उपलब्ध होंगे।


यह मिलेंगी सुविधा
आंचल अमृत कक्ष में प्रसूताओं की दुग्धपान संबंधी परेशानी का समाधान करेंगे, इससे जच्चा-बच्चा को लाभ मिल सके।
जिन प्रसूताओं के दूध नहीं उतर रहा या कम उतर रहा उसका समाधान।
जिनके स्तन में सूजन या गांठें हो, उन्हें विशिष्ट परामर्श देंगे।
अपरिपक्व और कम वजन होकर दूध नहीं पी सकने वाले बच्चों के लिए सुविधा।
बच्चों की नाक की नली से दूध पिलाया जा रहा हो, उन्हें सुविधा।
स्तनपान से संबंधी समस्याओं का समाधान होगा।

आंचल अमृत कक्ष के लाभ
प्रसूताओं को शिशु को स्तनपान कराने में सक्षम बनाना व उपचार देना।
नवजात को जन्म के एक घंटे (गोल्डन आवर) में मां का दूध उपलब्ध कराना।


नवजात को छह महीने तक अनिवार्य रूप से सिर्फ मां का दूध और दो साल तक मां का दूध पूरक आहार के साथ उपलब्ध कराना।
प्रसूताओं को स्तनपान से संबंधित परामर्श, प्रशिक्षण व उपचार सुविधा।
मां का स्तनपान नहीं कर पाने वाले शिशुओं को दान में प्राप्त मां का दूध उपलब्ध कराना।


शिशु मृत्यु दर में 22 फीसदी कमी और एसएनसीयू में भर्ती नवजात के बचने की 6 गुना तक संभावना। 40 फीसदी तेजी से रिकवरी होना।
कुपोषण को जड़ से समाप्त करना व जच्चा-बच्चा को स्वस्थ रखना।