21 मार्च 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मौसम बदला तो बढ़ी सांपों की हलचल, 10 दिनों में 30 से अधिक का रेस्क्यू

बारिश और गर्मी के उतार-चढ़ाव से बिलों से बाहर आने लगे सर्प, लोगों से सतर्क रहने की अपीलउदयपुर. शहर व आसपास के क्षेत्रों में अचानक मौसम परिवर्तन और बारिश के कारण जनजीवन के साथ-साथ वन्य जीवों की गतिविधियों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से सर्पों की हलचल बढ़ गई है। […]

2 min read
Google source verification
सांपों के जहर में हीमोटॉक्सिन और न्यूरोटॉक्सिन जैसे तत्व होते हैं, जिनके असर से पहले इलाज का पर्याप्त समय मिल जाता है।

SOURCE PATRIKA PHOTO

बारिश और गर्मी के उतार-चढ़ाव से बिलों से बाहर आने लगे सर्प, लोगों से सतर्क रहने की अपील

उदयपुर. शहर व आसपास के क्षेत्रों में अचानक मौसम परिवर्तन और बारिश के कारण जनजीवन के साथ-साथ वन्य जीवों की गतिविधियों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। विशेष रूप से सर्पों की हलचल बढ़ गई है। पिछले कुछ दिनों में गर्मी के बाद हुई बारिश के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकलने लगे हैं। इसके चलते आबादी वाले क्षेत्रों में इनके दिखने की घटनाएं बढ़ रही हैं।

वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर के अध्यक्ष, वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर और पर्यावरण प्रेमी डॉ. चमन सिंह चौहान ने बताया कि पिछले 10 दिनों में रेस्क्यू टीम ने करीब 30 सांपों को सुरक्षित पकड़कर वन क्षेत्रों में छोड़ा है। गुरुवार को भी टीम ने मनोहरपुरा, प्रतापनगर, बेडवास और गोवर्धन विलास क्षेत्रों से चार सांपों का रेस्क्यू किया।

मौसम बदलते ही बिलों से निकलते हैं सर्प

डॉ. चौहान ने बताया कि सांप ठंडे खून वाले जीव होते हैं। सर्दियों में तापमान कम होने के कारण वे अपने शरीर पर केंचुली चढ़ाकर सुरक्षित स्थानों पर चले जाते हैं और लगभग पांच महीने तक शीतनिद्रा में रहते हैं।

अप्रेल के आसपास गर्मी बढ़ने पर ये अपने पुराने बिल छोड़कर गहरे और सुरक्षित बिलों की तलाश करते हैं। इस समय वे न तो शिकार करते हैं और न ही किसी पर हमला करते हैं। जुलाई में बारिश शुरू होते ही उमस और भूख के कारण वे बिलों से बाहर निकलते हैं और इसी दौरान इंसान और सांप का आमना-सामना अधिक होता है।

जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा होती हैं सर्पदंश की घटनाएं

बारिश के मौसम में भूख और सक्रियता बढ़ने से जुलाई और अगस्त में सांप काटने की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। सितंबर तक मौसम अनुकूल होने और पर्याप्त भोजन मिलने से सांप अपेक्षाकृत शांत हो जाते हैं। भारत में हर साल लगभग 50 हजार लोगों की मौत सर्पदंश से होती है, जबकि समय पर अस्पताल पहुंचने पर अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है।

अंधविश्वास से बढ़ती हैं मौतें

डॉ. चौहान के अनुसार सर्पदंश के बाद कई लोग अस्पताल जाने के बजाय मंदिर, देवरा या झाड़-फूंक करने वाले बाबाओं के पास चले जाते हैं, इससे इलाज में देरी होती है और कई बार मौत हो जाती है। उन्होंने बताया कि सांपों के जहर में हीमोटॉक्सिन और न्यूरोटॉक्सिन जैसे तत्व होते हैं, जिनके असर से पहले इलाज का पर्याप्त समय मिल जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सांप कभी भी बिना कारण इंसान पर हमला नहीं करते, बल्कि केवल अपने बचाव में डसते हैं।

पर्यावरण संतुलन के लिए जरूरी हैं सर्प

उन्होंने कहा कि सांप पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये खेतों और जंगलों में चूहों और अन्य छोटे जीवों की संख्या नियंत्रित करके खाद्य श्रृंखला और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर ने लोगों से अपील की है कि यदि घर या आसपास कहीं भी कोई सांप या अन्य वन्य जीव दिखाई दे तो घबराने की बजाय तुरंत अनुभवी रेस्क्यू टीम को सूचना दें। रेस्क्यू सेंटर के अनुसार सहायता के लिए मोबाइल नंबर 9828058158 और 7737470311 पर संपर्क किया जा सकता है। टीम के पहुंचने तक वन्य जीव पर नजर बनाए रखने से रेस्क्यू कार्य आसान हो जाता है।