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जुगाड़ पर उदयपुर का विद्युत तंत्र, इधर-उधर के कबाड़ से चला रहे हैं काम

- विद्युत वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए कई कार्य कर रहा है, लेकिन पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हो रहे हैं

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जुगाड़ पर उदयपुर का विद्युत तंत्र, इधर-उधर के कबाड़ से चला रहे हैं काम

धीरेंद्र जोशी /उदयपुर. अजमेर विद्युत वितरण निगम शहर की विद्युत वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए कई कार्य कर रहा है, लेकिन पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। ऐसे में कार्य लम्बित करने के बजाय निगम इन्हें जुगाड़ से समय पर पूरा करने को मजबूर है।

विद्युत आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण संसाधन ब्रेकर होता है, जो जीएसएस पर लगा होता है और फॉल्ट आने की दशा में लाइन को ट्रीप करता है। शहर में आज भी 1994 से 1997 तक के ब्रेकर उपयोग में लिए जा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि गत दस वर्ष से निगम को उपलब्ध करवाए जा रहे ब्रेकर उदयपुर की परिस्थिति में उपयोगी नहीं है। ऐसे में इनकी बजाय पुराने ब्रेकर ही काम में लिए जा रहे हैं।

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नहीं मिलते पाट्र्स
20 से 25 वर्ष पूर्व काम में आने वाले ब्रेकर उपयोगी तो हैं, लेकिन इनके पार्ट नहीं मिलते। अधिकतर कर्मचारी आज भी पुराने ब्रेकर पर ही भरोसा करते हैं। ऐसे में लगभग सभी जीएसएस पर पुराने ब्रेकर ही लगे हुए हैं। इनमें किसी प्रकार की खराबी आने पर कर्मचारी खराब ब्रेकर में से पाट्र्स निकालकर अपने स्तर पर ही इन्हें ठीक करते हैं।

यह है समस्या
सूत्रों के अनुसार नए ब्रेकर में डिजिटल रिले सही नहीं है जिससे कई बार बिना फॉल्ट के लाइन ट्रीप हो जाती है तो कई बार फॉल्ट आने के बावजूद लाइन ट्रीप नहीं होती। इसकी साइज भी काफी छोटी है, इससे गर्मी के दिनों में परेशानी आती है। साथ ही ब्रेकर में लगे इंसुलेटर अच्छे नहीं है, जरा सी नमी आने पर परेशानी बढ़ जाती है और ब्रेकर जल जाते हैं। पुराने ब्रेकर में एनालॉग रिले आते थे, जो बेहतर काम करते हैं। जानकारों के अनुसार मेवाड़ में उच्च गुणवत्ता वाले ब्रेकर ही काम कर सकते हैं।

यहां भी होता है समझौता
लाइन खींचने में काम आने वाले रेबिट कंडक्टर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में विजल कंडक्टर से काम चलाया जा रहा है। एलटी कैबल नहीं आ रही है। ऐसे में नए ट्रांसफार्मर को पुरानी जली हुई कैबलों को छिलकर जुगाड़ से चार्ज करना पड़ रहा है। कर्मचारियों के सैफ्टी शूज नहीं है। ऐसे में एक पुराना और एक नया सैफ्टी शूज पहनकर बारिश में काम करना पड़ता है।