18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बाल विवाह की रस्म रुकेगी, जब पुलिस-प्रशासन नहीं होगा रस्मी

अक्षय तृतीया 3 मई को, पुलिस-प्रशासन की ओर से तैयारी नहीं, उदयपुर में पिछले साल रुकवाए 15 बाल विवाह, एक भी केस दर्ज नहीं

2 min read
Google source verification
बाल विवाह की रस्म रुकेगी, जब पुलिस-प्रशासन नहीं होगा रस्मी

बाल विवाह की रस्म रुकेगी, जब पुलिस-प्रशासन नहीं होगा रस्मी

संदीप पुरोहित

अक्षय तृतीया 3 मई को है। गांवों में इस अबूझ मुहूर्त पर अनेकों बाल विवाह होते आए हैं। जिन घरों में विवाह होने हैं, उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी होगी, लेकिन बाल विवाह रोकथाम के लिए जिम्मेदार पुलिस-प्रशासन अब तक तैयार नहीं है। न कंट्रोल रूम बनाया गया, न इससे संबंधित किसी तरह के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।

लिंक को क्लिक कर सर्वे में भाग लें.......

क्या प्रशासन बाल विवाह रोकने के लिए प्रर्याप्त प्रयास कर रहा है ?

बाल विवाह निषेध अधिनियम को लागू हुए 15 साल हो चुके हैं। इससे बाल विवाह के मामलों में गिरावट तो आई है, लेकिन अब भी बाल विवाह कुरीति खत्म नहीं हुई है। इसकी बड़ी वजह है कि ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई का अभाव है। प्रदेश के विभिन्न थानों में बीते 5 साल के दौरान बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत 46 प्रकरण दर्ज हुए। प्रकरणों में कुल 35 चालान पेश किए गए, वहीं 153 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसमें से 16 मामले तो पिछले साल के ही हैं, जिनमें 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

अगर उदयपुर जिले की बात करें तो बीते पांच साल में 25 बाल विवाह रुकवाए गए, उसमें भी अकेले 2021 में ही 15 ऐसे मामले सामने आए। बड़ी बात यह है कि एक भी मामले में प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। अगर सरकार दृढ़ निश्चय कर ले तो बाल विवाह को आसानी से रोका जा सकता है। इसके लिए गांव स्तर पर सरकारी तंत्र का इस्तेमाल करना होगा। पटवारी, ग्राम सेवक, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सूचना तंत्र विकसित करना होगा। इनकी सूचनाओं के आधार पर ही कार्रवाई करके आसानी से बाल विवाह रोके जा सकते हैं। आंकड़े भले ही कुछ भी कह रहे हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हर साल अक्षय तृतीया पर बेहिसाब बाल विवाह होते हैं।

इन जिलों में बाल विवाह अधिक
यूनीसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में बाल विवाह कुरीति अभी खत्म नहीं हुई है, फिर भी दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के केस कम है। प्रदेश के ऐसे 16 जिले नामित किए गए हैं, जहां अब भी बाल विवाह के मामले सामने आते हैं। इसमें उदयपुर संभाग के उदयपुर, चित्तौडग़ढ़ के अलावा जोधपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, चुरू, दौसा, झालावाड़, करौली, टोंक, बूंदी, नागौर, अलवर, पाली, सवाईमाधोपुर, बारां शामिल है।

पिछले साल दर्ज केस
जिला - केस संख्या - गिरफ्तार
जयपुर - 01 - 03
कोटा - 02 - 06
अजमेर - 01 - 00
चुरू - 01 - 01
जोधपुर - 02 - 03
सिरोही - 01 - 00
श्रीगंगानगर - 02 - 00
बाड़मेर - 02 - 01
जालौर - 01 - 00
भीलवाड़ा - 01 - 03
झालावाड़ - 01 - 04
चित्तौडग़ढ़ - 01 - 00