
Case registered by troubled farmer after fraud
मोहम्मद इलियास /उदयपुर . आदिवासियों के नाम से फर्जी बीमा क्लेम की राशि उठने के खुलासे के बाद आरोपितों ने परिवादिया को ही गायब कर दिया। इधर, पुलिस को बीमा कंपनी से मिले कुछ रिकॉर्ड में कई मृतकों की आयु में फेरबदल की जानकारी भी सामने आई है। महिला उपसरपंच के पति की मौत में भारी गड़बड़ी के साक्ष्य मिले। मौत के बाद न मेडिकल हुआ न ही पुलिस की कार्रवाई, फिर भी बीमा के लिए क्लेम किया गया।
पुलिस ने बताया कि आरोपित डालसिंह (मेलनर्स), उसका दलाल रमेश चौधरी, बीमा एजेन्ट दिलीप मेघवाल व पूर्व उपसरपंच शंकर लाल के खिलाफ मामला दर्ज किया था। गिरफ्तारी से पूर्व आरोपित बीमित परिवारों से सम्पर्क कर बरगला रहे हैं।
पुलिस ने बताया कि उन्होंने परिवादिया पुष्पा के पीहर पक्ष से भी सम्पर्क कर उन्हें चंद राशि देते हुए उसे ही गायब करवा दिया। पुलिस जब पीहर पक्ष के पास पहुंची उन्होंने गोलमाल जवाब दिए। बाद में उसे डूंगरपुर होना बता दिया। गौरतलब कि राजस्थान पत्रिका ने गत ३० मार्च के अंक में ‘जिनके खाने के लाले उनके नाम पर उठा लाखों का बीमा क्लेम’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर इस खेल का खुलासा किया था।
कागजों में आयु की हेराफेरी
पुलिस ने बताया कि अब तक मिले कागजों में डालसिंह के श्वसुर हमेर की आयु ५४ वर्ष बताई गई, जो पूरी तरह से संदेहास्पद है। जीवा गमेती पेन कार्ड व आधार कार्ड में उसके जन्म का वर्ष १९८२ है और बीमा क्लेम के लिए पेश वोटर आईडी में यह १९९८ दर्शाया गया है। इसी तरह कानाराम मीणा के पेन कार्ड व आधार कार्ड में १९८३ व वोटर आईडी कार्ड में १९९४ बताया गया। कागजों की प्रारंभिक जांच में ही प्रथमदृष्टया यह फर्जी रूप से तैयार करना सामने आया है।
पोस्टमार्टम, न पुलिस कार्रवाई, फिर भी क्लेम
लक्ष्मण गमेती के क्लेम मामले में पुलिस ने उसके पिता नाना के बयान लिए तो स्पष्ट हुआ कि उसका पुत्र बीमार रहता था। पोपल्टी में सरकारी स्कूल में छत पर काम करते हुए वह चक्कर आने से गिर गया। मौके पर ही मौत होने के बाद किसी तरह का कोई मेडिकल नहीं हुआ, न ही पुलिस की कार्रवाई हुई। मेल नर्स डालसिंह ने लक्ष्मण के इलाज करने के दौरान उसके बीमा के कागज तैयार किए। उन्हें इसका खुलासा पुलिस पूछताछ के बाद चला।
Published on:
10 Apr 2018 02:25 pm
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