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Political Diary : नाव के सहारे आदिवासी बेल्ट को साधने की कोशिश

गुजरात के आदिवासी बाहुल सीटों पर मिली जीत के बाद भाजपा अब यहां के आदिवासी अंचल में अधिक सक्रियता दिखा रही है। कारण साफ है, आदिवासी बाहुल सीटों पर कांग्रेस का अधिक प्रभाव रहता है, लेकिन गुजरात चुनाव के नतीजों से भाजपा संगठन की बांछे खिल गई हैं।

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Satish Poonia

अभिषेक श्रीवास्तव
विधानसभा चुनाव की घड़ियां जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे आरोप-प्रत्यारोप, दावे, वायदों का दौर तेज होता जा रहा है। कोई किसी को शीशे में उतारना चाहता तो कोई पुराने घरों को फांदकर नया दायरा बनाने के लिए प्रयासरत है। सरकार के चार साल के कार्यकाल के प्रचार के साथ ही भाजपा की जनाक्रोश यात्रा चरम पर है। मेवाड़ और वागड़ की सियासत भी इसी ओर सक्रिय है। भाजपा के क्षेत्रीय क्षत्रप अपने हिसाब से नफा-नुकसान और विरोधी खेमे को ध्यान में रखकर सियासी नाव में सफर कर रहे हैं।

गुजरात के आदिवासी बाहुल सीटों पर मिली जीत के बाद भाजपा अब यहां के आदिवासी अंचल में अधिक सक्रियता दिखा रही है। कारण साफ है, आदिवासी बाहुल सीटों पर कांग्रेस का अधिक प्रभाव रहता है, लेकिन गुजरात चुनाव के नतीजों से भाजपा संगठन की बांछे खिल गई हैं। इसीलिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां पिछले तीन दिनों से उदयपुर संभाग में डेरा डाले हुए हैं। वे खुद नाव चलाकर जयसमंद झील के टापू बाबा मगरा पहुंचे। दावा किया कि बीजेपी के वे पहले प्रदेश अध्यक्ष हैं जो यहां आए हैं। इन सब के बीच नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। जनाक्रोश के बहाने वह सरकार को निशाने पर लिए हुए हैं। बीजेपी ने चुनावी वर्ष को ध्यान रखकर अपना कार्यक्रम जारी कर दिया है। साथ ही जनता का फीडबैक लेने के लिए फार्म भी भरवाया जा रहा है, जिससे अंदाजा लग सके कि सरकार को कहां किस मुद्दे पर घेरना है।
उधर, राहुल गांधी की यात्रा से खाली हुई कांग्रेस भी अब हुंकार भरने के लिए तैयार है। बांसवाड़ा में प्रदेश सरकार के मंत्री अर्जुन सिंह बामनिया इन दिनों अपने क्षेत्र में ही अधिक सक्रिय हैं। चुनाव में एक साल से भी कम समय को देखते हुए वे उद्घाटन और शिलान्यास में व्यस्त हैं। कुछ दिनों पूर्व प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरदेव जोशी की पुण्यतिथि पर बांसवाड़ा में हुए आयोजनों में कांग्रेस के अधिकांश बड़े चेहरे नदारद रहे। उदयपुर में भी कांग्रेस आने वाले एक सप्ताह में कई कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है, हालांकि इसमें संगठन की भूमिका कम और उसके सिय़ासी क्षत्रपों की भूमिका अधिक है। आयोजन में वे चेहरे अधिक शामिल हैं, जो पुराने घरों के आगे नया घर बनाना चाहते हैं। हालांकि इन सब के बीच आदिवासी अंचल के टीएसपी क्षेत्र में शिक्षक भर्ती रीट में पदों की बढ़ोतरी की मांग को लेकर अभ्यर्थी मुखर होने लगे हैं। यह भी सियासी मुद्दा बनता दिख रहा है।