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भाजपा में अंतरद्वंद्व : पांच दिन में दूसरा ‘शक्ति प्रदर्शन’

पंजाब के राज्यपाल कटारिया के आगमन पर जुटी ऐतिहासिक भीड़, बीते रविवार को होली स्नेह मिलन में जिलाध्यक्ष ने जुटाई थी भीड़ उदयपुर. शहर भाजपा अंतरद्वंद्व से गुजर रही है। नतीजा ये कि बीते पांच दिन में ही दूसरी बार ‘शक्ति प्रदर्शन’ देखने को मिल गया है। जहां 29 मार्च को होली स्नेह मिलन समारोह […]

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शहर भाजपा अंतरद्वंद्व से गुजर रही है। नतीजा ये कि बीते पांच दिन में ही दूसरी बार 'शक्ति प्रदर्शन' देखने को मिल गया है। जहां 29 मार्च को होली स्नेह मिलन समारोह के नाम पर जिलाध्यक्ष ने भारी भीड़ जुटाई थी, वहीं शुक्रवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के आने पर स्वागत करने ऐतिहासिक भीड़ जुटी।

source patrika photo

पंजाब के राज्यपाल कटारिया के आगमन पर जुटी ऐतिहासिक भीड़, बीते रविवार को होली स्नेह मिलन में जिलाध्यक्ष ने जुटाई थी भीड़

उदयपुर. शहर भाजपा अंतरद्वंद्व से गुजर रही है। नतीजा ये कि बीते पांच दिन में ही दूसरी बार 'शक्ति प्रदर्शन' देखने को मिल गया है। जहां 29 मार्च को होली स्नेह मिलन समारोह के नाम पर जिलाध्यक्ष ने भारी भीड़ जुटाई थी, वहीं शुक्रवार को पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के आने पर स्वागत करने ऐतिहासिक भीड़ जुटी। भीड़ इतनी, मानो कटारिया पहली बार उदयपुर आए हों। दोनों ही आयोजनों में जुटी भीड़ शक्ति प्रदर्शन का साफ संकेत देती है।

इस तरह से समझिए, दोनों खेमों के खेल को

शक्ति प्रदर्शन : एकआयोजन : भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह के नेतृत्व में होली स्नेह मिलन समारोह एक वाटिका में हुआ, जिसमें समूचे शहर के भाजपा कार्याकर्ता और पदाधिकारी जुटे थे।वजह : 'उदयपुर फाइल्स' को लेकर भाजपा की खूब किरकिरी हो चुकी है, जवाब में शक्ति प्रदर्शन करना था। आयोजन भी 27 मार्च को केस की चार्जशीट पेश होने के ठीक बाद किया गया।मायने : भीड़ जुटाकर संकेत देना था कि आरोप दरकिनार है। भाजपा मजबूत स्थिति में है। 'उदयपुर फाइल्स' को हवा देने वालों को जवाब देना था कि पार्टी में किसी तरह का डेमेज नहीं हुआ है।कमी : आयोजन में भले ही भीड़ खूब जुटी, लेकिन विरोधी खेमे से संख्या बहुत कम रही। या जो लोग गए, वो भी शक्ति प्रदर्शन की टोह लेने गए थे। आला नेताओं ने कार्यकर्ताओं रोक भी दिया।

शक्ति प्रदर्शन : दोआयोजन : पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के उदयपुर पहुंचने पर एयरपोर्ट पर भारी भीड़ जुटी। इतनी भीड़ तो उनके राज्यपाल बनकर लौटने पर भी नहीं जुटी थी।वजह : पिछले दिनों कटारिया की शिकायत राष्ट्रपति से की गई थी कि वे पंजाब के राज्यपाल हैं, फिर भी बार-बार उदयपुर आते हैं और यहां की राजनीति में दखल देते हैं।मायने : कटारिया विरोधी खेमे को जवाब देना था कि उनका पलड़ा भी कमजोर नहीं है। चाहे 5 दिन पहले ही भारी भीड़ जुटाई गई हो, लेकिन दूसरे खेमे में भी समर्थक खूब हैं।कमी : एयरपोर्ट पर स्वागत करने वालों से लेकर काफिले में वाहनों की संख्या तो खूब थी, लेकिन शहर भाजपा के पदाधिकारी नदारद थे। भाजपा के मंडलों में से इक्का-दुक्का लोग ही पहुंचे।

एयरपोर्ट: कई नाम ऐसे जो पहली बार पहुंचेराज्यपाल कटारिया के पहुंचने पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। विधायक ताराचंद जैन, फूलसिंह मीणा, उदयलाल डांगी, प्रताप गमेती, देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली, डॉ. किरण जैन, पूर्व जिलाध्यक्ष रवींद्र श्रीमाली, पूर्व उपसभापति महेंद्रसिंह शेखावत, अतुल चण्डालिया ने स्वागत किया। मीडिया संभाग प्रभारी चंचल अग्रवाल ने बताया कि पूर्व विधायक नानालाल अहारी, दलीचंद डांगी, केजी पालीवाल, कुलदीप सिंह चुंडावत, संजय चंदेल, जिलाध्यक्ष चंद्रगुप्त सिंह चौहान, पूर्व जिला प्रमुख शांतिलाल मेघवाल, डालचंद डांगी, डॉ. गीता पटेल, पूर्व कोषाध्यक्ष मनमोहन राज सिंघवी, पूर्व महापौर जीएस टांक, रजनी डांगी, पूर्व उपसभापति महेंद्र सिंह शेखावत, बार एसोसिएशन अध्यक्ष जितेंद्र जैन, पूर्व अध्यक्ष मनीष शर्मा, रामकृपा शर्मा, यशवंत आंचलिया, देहात महामंत्री दीपक शर्मा, पूर्व महामंत्री आकाश बागरेचा, डॉ. सोनिका जैन, जिनेन्द्र शास्त्री आदि थे। कटारिया एयरपोर्ट से एकलिंगजी मंदिर पहुंचे।

होली मिलन: कई चेहरे, जो दोनों जगह दिखे

पिछले डेढ़ माह से उदयपुर फाइल्स से जूझ रही भाजपा शहर कार्यकारिणी के लिए होली मिलन समारोह चुनौती भरा था। अधिकाधिक भीड़ जुटाने का लक्ष्य दिया गया था। पहला सवाल तो ये कि स्नेह मिलन होली के 25 दिन बाद क्यों करना पड़ा? वहीं, वीडियो कांड की चार्जशीट पेश होने के तुरंत बाद क्यों करना पड़ गया? क्या वीडियो कांड की चार्जशीट में भाजपा नेताओं के बच निकलने की खुशी थी? जब आयोजन में भीड़ जुटाने की तैयारी हो रही थी, तब ही विरोधी खेमे से आला पदाधिकारी अपनों को कॉल करके कह रहे थे कि आयोजन में नहीं जाना है। इसके बावजूद कई चेहरे ऐसे हैं, जो स्नेह मिलन में गए और शुक्रवार को एयरपोर्ट पर भी दिखे। क्या वे टोह लेने गए थे, जिसकी सूचनाएं विरोधी खेमे तक पहुंचा सके? स्नेह मिलन की भीड़ को अपनी सफलता मानते हुए शहर पदाधिकारियों ने वीडियो भी वायरल किए। वीडियो उन्हें भी शेयर किए गए, जो आयोजन का हिस्सा नहीं थे और दूसरे खेमे से हैं।