3 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

उदयपुर के एमबी हॉस्पिटल में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना की बदहाली, अब इंसुलिन के लिए घंटों भटकती रही वृद्धा

-महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के वरिष्ठजन नि:शुल्क दवा काउंटर पर अव्यवस्थाएं बुजुर्ग मरीजों की सेहत में सुधार में बाधक बन रही है।

2 min read
Google source verification
Case of Maharana Bhopal Hospital IN Udaipur

उदयपुर . महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के वरिष्ठजन नि:शुल्क दवा काउंटर पर अव्यवस्थाएं बुजुर्ग मरीजों की सेहत में सुधार में बाधक बन रही है। हृदय रोगियों के बाद शनिवार को उम्रदराज मधुमेह रोगियों के लिए काउंटर पर दवाइयों की अनुपलब्धता का मामला सामने आया।

READ MORE : एमबी हॉस्पिटल : सफाईकर्मियों ने किया प्रदर्शन, हड़ताल से पसरी गंदगी, सांस लेना दुश्वार

काउंटर पर आधी दवाइयां देने के बाद फार्मासिस्ट ने ६५ वर्षीय बुजुर्ग महिला को इंसुलिन की अनुलब्धता बताते हुए निजी मेडिकल स्टोर पर जाने को बेबस कर दिया। एेसा स्थिति झाड़ोल निवासी ७२ वर्षीय गौतम लाल मेघवाल की रही। उन्हें भी काउंटर पर इंसुलिन की कमी बताई गई। गौरतलब है कि पूर्व में चिकित्सालय परिसर में मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के २५ काउंटर थे। इसके बाद फार्मासिस्ट की कमी को देखते हुए इनकी संख्या कम करते हुए १५ कर दी गई। इसमें भी वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य सुविधा और दवाइयों की उपलब्धता को लेकर अलग से काउंटर बनाया गया। इसके बावजूद जिम्मेदार बुजुर्ग मरीजों की व्यवस्था को सुदृढ़ करने में विफल साबित हो रहे हैं।

फार्मासिस्ट और हेल्पर हावी
प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता प्रबंध के दावे किए जा रहे हैं। दूसरी ओर नि:शुल्क दवा योजना काउंटर पर तैनात कुछ फार्मासिस्ट और हेल्पर जिम्मेदारियों से बचने के लिए आवश्यक स्टॉक जुटाने की बजाय लापरवाही बरत रहे हैं। एेसे में बुजुर्गों को इधर-उधर धक्के खाने पड़ रहे हैं। स्थिति तब और खराब हो जाती है, जब परामर्श पर्ची में कुछ दवाइयां लिखकर फार्मासिस्ट उसकी एक प्रति अपने पास रख लेते हैं और दूसरी प्रति बुजुर्ग को सौंप देते हैं।

एेसे में दूसरे काउंटर से भी दवा लेना संभव नहीं हो पाता है। एेसे में परामर्श पर्ची की दोबारा फोटो कॉपी करवानी पड़ती है या फिर मरीज को दूसरे काउंटर पर जाकर मूल पर्ची ही देनी पड़ती है। कई बार समस्या से हताश होकर बुजुर्ग रोगी बाहरी मेडिकल स्टोर पर जाकर जेब ढीली कर आते हैं। इसके अलावा पर्ची पर नोट एप्लीकेबल के लिए एनए लिखने की बजाय जल्दबाजी में एेसा गोला लगाया जाता है कि बुजुर्ग उसे समझने के लिए दुविधा में रहता है।

स्टॉक में कमी नहीं
आरएनटी मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित ड्रग हाउस में इंसुलिन के स्टॉक की कमी नहीं है। काउंटर से डिमांड भेजने पर हम दवाइयां उपलब्ध कराते हैं। काउंटर संचालन की व्यवस्था हमारे हिस्से में नहीं आती।

-डॉ. दीपक सेठी, प्रभारी, आरएनटी ड्रग हाउस