
उदयपुर : एक बच्चे के लिए उसका परिवार सुरक्षा कवच होता है, लेकिन जब कवच ही दरकने लगे तो बच्चों के भविष्य पर संकट आना लाजिमी है। कुछ ऐसी ही मनोदशा उन किशोर और किशोरियों की होती है, जिन्होंने अपने जीवन में जान-अनजाने कोई अपराध किया।
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के एक अध्ययन में सामने आया कि बच्चों के अपराध की दुनिया में जाने के पीछे उनका परिवार कहीं न कहीं जिम्मेदार रहा है। एमपीयूएटी की शोधार्थी शैलजा देवी ने मानव विकास एवं पारिवारिक अध्ययन विभाग सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.गायत्री तिवाड़ी के मार्गदर्शन में किशोर गृह में रह रहे बाल अपचारियों पर अध्ययन किया, तो ये तथ्य सामने आए। बाल अपराध के लिए एकल परिवार, कमजोर आर्थिक स्थिति, माता-पिता का अशिक्षित होना भी प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा इन किशोर-किशोरियों के अधिकांश परिवार के सदस्यों का मादक द्रव्य/ ड्रग्स आदि के सेवन का इतिहास रहा है। अध्ययन के निष्कर्षों से पता चलता है कि 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग के अपराधी अन्य आयु वर्ग की तुलना में अधिक संवेदनशील थे।
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मुताबिक बच्चों में बढ़ रहे अपराध के ये कारण हैं-
- अधिकांश अपराधी किशोर और किशोरियां एकल परिवारों से।
- अधिकांश के परिवार में तीन से अधिक भाई-बहन।
- किशोर अपराधियों के पिता का मुख्य रूप से कृषि और दैनिक मजदूरी करना पाया
- अधिकांश निम्न आय वर्ग से। जिनके परिवारों की वार्षिक आय 25 हजार रुपए तक।
- माता-पिता का व्यवहार बच्चों के प्रति कठोर पाया गया।
- अधिकांश लड़के, लड़कियों के विभिन्न प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन किए जाने की बात सामने आई।
15 किशोर व 15 किशोरियां केस स्टडी में शामिल
16 से 18 वर्ष तक के किशोर-किशोरियों पर अध्ययन
35 वर्ष से कम आयु अपचारी किशोरियों की माताओं की
35 से 45 वर्ष की आयु अपचारी किशोरों के पिता की
केस स्टडी में सामने आया कि किशोरों ने हत्या और बलात्कार जैसे अपराध किए। वहीं, किशोरियां चोरी, हमले और अपहरण की आरोपी पाई गईं। ये किसी गिरोह के साथ अपराध में शामिल हुईं।
Published on:
21 Feb 2024 03:56 pm
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