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उदयपुर. कभी बढ़ती उम्र की समस्या माने जाने वाले गर्दन दर्द और सर्वाइकल संबंधी रोग अब 20 से 40 वर्ष के युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं। शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों की फिजियोथेरेपी तथा ऑर्थोपेडिक ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप पर काम करना, गलत पॉश्चर में बैठना, नियमित व्यायाम का अभाव और घंटों तक एक ही स्थिति में बैठे रहने की आदत इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।
हर दिन बढ़ रहे गर्दन दर्द के मरीज
एमबी हॉस्पिटल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एमपी जैन के अनुसार पहले सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस और गर्दन दर्द की शिकायतें अधिकतर 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में देखने को मिलती थीं, लेकिन अब कॉलेज विद्यार्थियों, आईटी प्रोफेशनल, बैंक कर्मचारी, निजी कंपनियों में कार्यरत युवाओं और वर्क फ्रॉम होम करने वालों में भी यह समस्या तेजी से सामने आ रही है। एमबी हॉस्पिटल की ट्रॉमा ओपीडी में हर सप्ताह ऐसे 50 से ज्यादा युवाओ के मामले आते है। फिजियोथेरेपी विभाग में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या गर्दन, कंधे और ऊपरी पीठ के दर्द से पीड़ित युवाओं की है।
मोबाइल और लैपटॉप ने बदली दिनचर्या
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ तरुण रलोत बताते हैं लगातार कई घंटे तक मोबाइल पर झुककर देखना, लैपटॉप को आंखों के स्तर से नीचे रखकर काम करना और बीच-बीच में ब्रेक नहीं लेना गर्दन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। वर्क फ्रॉम होम के बाद स्क्रीन टाइम में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिससे युवाओं में सर्वाइकल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसके कारण मांसपेशियों में खिंचाव, अकड़न और सर्वाइकल डिस्क पर असर पड़ता है। कई लोग दर्द को सामान्य समझकर दर्दनिवारक दवाइयों से काम चलाते रहते हैं, जिससे समस्या धीरे-धीरे बढ़ जाती है।
व्यायाम की कमी भी बड़ी वजह
चिकित्सकों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि लगातार कम हो रही है। कार्यालय में घंटों बैठकर काम करने के बाद अधिकांश लोग घर पहुंचकर भी मोबाइल या टीवी के सामने समय बिताते हैं। इससे गर्दन, कंधे और रीढ़ की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। नियमित स्ट्रेचिंग, योग और हल्के व्यायाम की कमी भी सर्वाइकल दर्द को बढ़ावा दे रही है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- गर्दन में लगातार दर्द
- गर्दन में अकड़न
- सिरदर्द
- कंधों तक दर्द फैलना
- हाथों में झुनझुनी
- हाथों में सुन्नपन महसूस होना
- हाथों में कमजोरी महसूस होना
बचाव ही सबसे बेहतर उपाय
- लगातार 30 से 40 मिनट बैठने के बाद कुछ मिनट का ब्रेक लें
- मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखकर इस्तेमाल करें
- लैपटॉप/कंप्यूटर की स्क्रीन को आंखों की सीध में रखे
- नियमित योग और स्ट्रेचिंग को दिनचर्या में शामिल करें
- रोज कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें (वॉक/एक्सरसाइज)
- सही बैठने की मुद्रा (पोश्चर) अपनाएं
- लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें
Published on:
29 Jun 2026 06:01 pm
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