
उदयपुर डाक बंगला
मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. झीलों की नगरी अति विशिष्ट व्यक्तियों (वीआईपी) का आना-जाना इतना होता है कि यहां फतहसागर झील किनारे स्थित सर्किट हाउस छोटा पड़ गया है। वहां आने वाले अधिकांश मेहमानों को इसलिए मना करना पड़ता है कि वहां ठहरने के जो कमरे होते है वे भरे होते है। नए कमरे बनाने की कवायद में कानूनी उलझन आई तो अब झील के पास ही दूसरा सर्किट हाउस तैयार किया जाएगा। असल में जो डाक बंगला है उसके १३ कमरों में दूसरा सर्किट शुरू होगा।
पिछले कुछ सालों से उदयपुर के सर्किट हाउस यहां आने वाले मेहमानों की संख्या को देखते हुए छोटा हो गया। पूर्व में कुछ कमरे बढ़ाए गए और जब वापस कमरें बढ़ाने की कवायद आई तो निर्माण निषिद्ध क्षेत्र के कानूनों की अड़चन से बात नहीं बनी। यहां आने वाले अति विशिष्ट व्यक्तियों को वीवीआईपी के मूंमेंट के दौरान तो साफ तौर पर मना करना होता है। अब राज्य सरकार ने तय किया है कि फतहसागर के पास ही आनंद भवन के नीचे स्थित सार्वजनिक निर्माण विभाग के डाक बंगले के कमरे सर्किट हाउस को दे दिए जाए।
सरकार ने मुहर लगा दी
सार्वजनिक निर्माण विभाग में फाइल चली, उप मुख्यमंत्री एवं सार्वजनिक निर्माण मंत्री सचिन पायलट के कार्यालय में भी फाइल गई। सार्वजनिक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता अक्षय कुमार जैन ने इस पर आदेश भी निकाल दिया जिसमें कहा कि डाक बंगले में १७ कमरों में से चार कमरों को छोडक़र बचे १३ कमरें सर्किट हाउस के लिए सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) को स्थायी रूप से दे दिए जाए। डाक बंगले में कमरों के अलावा दो डोरमेट्री, केन्टिन आदि है।
जीएडी को भेजा प्रस्ताव
इधर, सर्किट हाउस की तरफ से जीएडी को डाक बंगले के १३ कमरों के हस्तांरण के आदेश की जानकारी से अवगत कराते हुए आगे का मार्गदर्शन मांगा है। वैसे वहां सबसे पहले मेनेंटेनस का कार्य किया जाएगा, गार्डन, सडक़ और कमरों का रखरखाव और फर्नीचर का कार्य पूरा होने के बाद अगली रूपरेखा तय की जाएगी।
शुरूआत में वहां ठहराएंगे
सर्किट हाउस में बुकिंग के बाद जब यहां सब कमरें फुल हो जाएंगे तब बुक होने वाले कमरों का आवंटन डाक बंगले में किया जाएगा। वहां पर शुरूआती में सुबह चाय व ब्रेकफॉस्ट का प्रबंध किया जाएगा। लंच व डीनर के लिए वहां ठहरने वाले यात्रियों का प्रबंध मुख्य सर्किट हाउस में ही होगा। वैसे दोनों ही स्थान फतहसागर के पास ही है। साथ ही अगर डाक बंगलों के कमरे भी अमूमन फुल रहेंगे तो वहां मुख्य भवन की तरह ही दूसरा सर्किट हाउस संचालित किया जाएगा, इसमें वहां लंच-डीनर भी शुरू कर दिया जाएगा।
एक नजर में कमरों की संख्या
- 30 कमरें सर्किट हाउस में
- 17 कमरें डाक बंगले में
- 13 कमरें देंगे सर्किट हाउस को
- 04 कमरें पीडब्ल्यूडी के पास रहेंगे
इनका कहना है...
राज्य सरकार के स्तर निर्णय हुआ है। इसमें चार कमरें विभाग के पास रखकर बाकी कमरें सर्किट हाउस को दिए जाएंगे। हमने संबंधित को सूचित कर दिया है।
- अक्षय कुमार जैन, उप सचिव (वक्र्स)
पीडब्ल्यूडी जयपुर
Updated on:
25 Dec 2019 12:43 pm
Published on:
25 Dec 2019 12:40 pm
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