20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

VIDEO: महाविद्यालय ने तैयार की सब्जियों की नर्सरी, सस्ती दरों पर मिलते पौधे

यदि आप घर में कीचन गार्डन लगाने की रूचि रखते हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद फायदेमंद है। आप तैयार सब्जियों के पौधे लाकर घर लगा सकते हैं। ऐसा ही काम किया है उदयपुर शहर के महाराणा प्रताप एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के उद्यानिकी विभाग ने।

less than 1 minute read
Google source verification
VIDEO: महाविद्यालय ने तैयार की सब्जियों की नर्सरी, सस्ती दरों पर मिलते पौधे

VIDEO: महाविद्यालय ने तैयार की सब्जियों की नर्सरी, सस्ती दरों पर मिलते पौधे

मधुसूदन शर्मा
उदयपुर.
यदि आप घर में कीचन गार्डन लगाने की रूचि रखते हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद फायदेमंद है। आप तैयार सब्जियों के पौधे लाकर घर लगा सकते हैं। ऐसा ही काम किया है उदयपुर शहर के महाराणा प्रताप एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी के उद्यानिकी विभाग ने। विभाग ने यहां सब्जियों की नर्सरी तैयार की है। इन सब्जी के पौधों को लाकर आप घर पर गमले में लगा सकते हैं। उदयपुर के राजस्थान कृषि महाविद्यालय परिसर में स्थित हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट के वरिष्ठ सब्जी वैज्ञानिक डॉ. कपिल देव आमेटा ने बताया कि विभाग की नर्सरी में खास तरह के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इन पौधों को तैयार करने में उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उपयोग किया जाता है। इन पौधों को घर लगाने में करीब एक माह लगता है लेकिन नर्सरी में तैयार पौधे लेकर घर पर लगा सकते हैं। ये पौधे कीचन गार्डन व पोली खेती करने वाले किसानों के लिए उपयोगी है। यहां पर तीन तरह की तोता, हरी और शिमला मिर्च, तीन विदेशी सैलेरी, पार्सले और बेसिल सब्जी भी तैयार की गई। मात्र तीन से 15 रूपए में यहां पौधे उपलब्ध हैं।

इन सब्जियों के पौधे तैयार
विभाग की इस नर्सरी में मिर्ची, बैंगन, टमाटकर, फूलगोभी, हरंग की फूलगोभी, बेसिल, प्याज, लाल गोभी आदि तैयार किए गए हैं। फूलों में भी गेंद और गुलाब के साथ विभिन्न तरीके की वैराइटी के फूल यहां तैयार किए जा रहे हैं।

ऐसे तैयार करते हैं पौधे
सब्जी वैज्ञानिक डा.आमेटा ने बताया कि मिटटी में आधे अधूरे बीज ही तैयार हो पाते हैं। इसलिए प्लास्टिक की ट्रे में इन पौधों को तैयार किया जाता है। इसमें बने ब्लॉक में नारियल छिलका, वर्मीकुलाईट, परलाइट का इस्तेमाल कर इसमें बीज डाला जाता है। इन बीजों का मिट्टी से कोई संपर्क नहीं होता है। इस कारण इसमें कवक जनित रोग नहीं होते।