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पढ़िए कैसे उदयपुर में यूआईटी की गलतियोंं से तालाब में कॉलोनियां बस गई

प्रतापनगर से अहमदाबाद बाइपास के समीप है रूण्डेला

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Colonies in the pond are settled with UIT's mistakes in Udaipur

पढ़िए कैसे उदयपुर में यूआईटी की गलतियोंं से तालाब में कॉलोनियां बस गई

भुवनेश पण्ड्या/उदयपुर. रूण्डेला तालाब कभी जहां आस-पास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों की प्यास बुझाता था, वहीं कुएं और ट्यूबवैल का जलस्तर सुधारता था। वह आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यह तालाब अब कागजों में ही रह गया है क्योंकि इस पर कॉलोनियां काटकर मकान बना दिए गए हैं। नगर विकास प्रन्यास के अधिकारियों ने आंखें मूंद कर बरसों पूर्व तालाब पेटे की 90बी कर दी। यूआईटी ने जैसे ही कॉलोनाइर्ज के कंधे पर हाथ रखा, उन्होंने पूरे तालाब को खुर्द-बुर्द कर दिया। करीब 30 बीघा जमीन पर फैले इस तालाब के पेटे में कई मकान बन चुके हैं, वहीं तालाब में कटे प्लॉट की चारदीवारियां बना दी गई हैं। अहमदाबाद हाईवे से जुड़े इस तालाब की जमीन काफी बेशकीमती है।

यह है पूरी कहानी
वर्ष 2002-03 में नगर विकास न्यास ने तालाब पेटे की 90 बी कर लोगों को पट्टे बांट दिए। जब वर्ष 2006 में अतिवृष्टि हुई तो लोगों के घरों में पानी घुसने लगा। ऐसे में पटवारी से सर्वे करवाया गया। इसमें सामने आया कि यह तालाब पेटा है। वर्ष 2007 में यह मामला संभागीय आयुक्त के पास पहुंचा। इस पर आयुक्त ने पट्टे खारिज कर दिए। इस निर्णय के विरोध में कई लोग हाइकोर्ट पहुंच गए। फिलहाल यह मामला हाइकोर्ट में विचाराधीन है।


होती थी सिंचाई
इस तालाब पर खेती होती थी, जब तालाब हल्का खाली होता था, तो गेहूं व सब्जियां होती थी। इस तालाब का तीतरड़ी, मनवाखेड़ा गांवों को इसका लाभ मिलता था।


पूरा तालाब ही खुर्द-बुर्द
पूरे तालाब पर ही अतिक्रमण है। पेटे में मकान बने हुए हैं। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष खसरा संख्या 300 से 500 की सीरीज में है, जबकि कुछ क्षेत्र 600 में शामिल हैं। तालाब के जिस हिस्से में कोई मकान नहीं है, वहां लोगों ने प्लाट काट रखे हैं।


तालाब पेटे की यूआईटी ने मार्किंग कर रखी है। कई मकान बने हुए हैं। यूआईटी ने जो किया है, वह गलत है क्योंकि यह तालाब है, जिसे कानूनन आम जमीन की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। मामला हाइकोर्ट में विचाराधीन है। वहां से फैसला आने के बाद ही कुछ हो सकता है। - बाबूलाल तेली, पटवारी तीतरड़ी

यह मामला काफी पुराना है। कोर्ट जो भी निर्णय लेगा, उसके आधार पर हम आगे कदम बढ़ाएंगे। उस समय जब यह पट्टे जारी हुए तब क्या परिस्थिति रही, इस पर क्या कहा जा सकता है। - उज्ज्वल राठौड़, सचिव नगर विकास प्रन्यास

रूण्डेला तालाब पर एक नजर
100 तालाब पेेटे
में निर्माण
10 फीट तालाब
की गहराई
30 बीघा में फैला तालाब का क्षेत्रफल
45 से अधिक मामले हाइकोर्ट में लम्बित