
स्थानीय अनदेखी से शव के मोक्ष मार्ग पर 'संकटÓ
उदयपुर/ गींगला. प्राकृतिक आपदा में उजड़े श्मशान को लेकर ग्राम पंचायत खरका की बेरूखी अंतिम यात्रा के शवों के लिए संकट बनी हुई है। आलम यह है कि 5साल पहले खरका नदी में आए बहाव से क्षतिग्रस्त हुए श्मशान स्थल के सुधार को लेकर किसी स्तर पर जहमत नहीं उठाई गई। समस्या को स्थानीय लोगों में बरसात के दिनों में होने वाली मौतों को लेकर चिंता गहरा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने साल बीतने के बाद भी ग्राम पंचायत ने समस्या सुधार की पहल नहीं की। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी में होने वाले अवैध बजरी खनन से भी श्मशान स्थल पर संकट बना हुआ है। बावजूद इसके किसी स्तर पर इसकी सुध नहीं ली जा रही है।गौरतलब है कि 29 जुलाई 2014 को खरका नदी में आए बहाव के बीच धूलजी का गुड़ा स्थित पुल व श्मशान क्षतिग्रस्त हो गए थे। श्मशान के टीनशेड बह गए थे तो एंगल झुक गए थे। तब से लेकर अब तक हालात में कोई परिवर्तन नहीं आया है।
कोई ध्यान नहीं देता
ग्राम पंचायत की उदासीनता से श्मशान घाट निर्माण का कार्य नहीं हो सका। कई बार प्रस्ताव दिए गए, लेकिन हर बार अनदेखी की गई। सांसद व विधायक को भी अवगत कराया गया, पर कुछ नहीं सुधरा। फिर से सांसद, विधायक व जिला प्रमुख का ध्यान इस बार आकर्षित किया गया है। नाहर सिंह राठौड़, खरका, जिला महामंत्री, भाजयुमो
जमीन आवंटन ने अटकाया
श्मशान के पुनर्निर्माण के प्रस्ताव कई बार भेजे गए, लेकिन जमीन आवंटन की खामियों से निर्माण संभव नहीं हुआ। अब नरेगा में फिर से प्रस्ताव भेजे हैं। उम्मीद है जल्द कार्य पूरा होगा।
नंगाराम मीणा, सरपंच, ग्राम पंचायत खरका
Published on:
01 Jul 2019 06:00 am
