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Patrika Impact: सीडब्ल्यूसी टीम पहुंची अस्पताल, पूछी बच्चे की कुशलक्षेम

ऑपरेशन के बाद बच्चे की आंतें बाहर निकलने का मामला, अस्पताल प्रबंधन को विशेष देखरेख के निर्देश
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उदयपुर

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Madhulika Singh

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Updated: 9 Feb 2018, 2:00 PM IST

case of new born, mb hospital

मो.इल‍ियास/उदयपुर. राजकीय बाल चिकित्सालय में चिकित्सकों की घोर लापरवाही से बच्चे के ऑपरेशन के बाद लगाए टांके टूटने से आंतें बाहर आने के मामले में बाल कल्याण समिति ने प्रसंज्ञान लेते हुए गुरुवार को अस्पताल पहुंच कर बच्चे की कुशलक्षेम पूछी और अस्पताल प्रबंधन को विशेष देखरेख के निर्देश दिए।
बाल कल्याण समिति अध्यक्ष डॉ.प्रीति जैन, सदस्य बी.के.गुप्ता व राजकुमारी भार्गव सुबह बाल चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने बच्चे के बारे में पहले कार्यवाहक विभागाध्यक्ष डॉ.लाखन पोसवाल से पूरी जानकारी ली। डॉ. पोसवाल टीम के साथ बाल आईसीयू में पहुंचे और उन्होंने बच्चे के पूरे उपचार के बारे में जानकारी दी। टीम बच्चे के पिता भीलवाड़ा निवासी हिमांशु दाधिच व उनकी पत्नी पूजा से भी मिली। दम्पती ने सीडब्ल्यूसी के समक्ष राजस्थान पत्रिका आभार जताया। उन्होंने बच्चे के उपचार में अब चिकित्सकों द्वारा की जा रही विशेष देखकर पर संतुष्टि जाहिर की।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका ने 7 फरवरी के अंक में ‘ऑपरेशन के बाद मासूम का फटा पेट, बाहर निकली आंतें’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। पत्रिका ने रात को ही भीलवाड़ा निवासी पूजा पत्नी हिमांशु दाधीच के दो माह के मासूम दक्ष के ऑपरेशन के बाद टांके टूटने से बाहर निकली आंतों के बारे वरिष्ठ चिकित्सकों को सूचना दी थी। उसके बाद रातोंरात शल्य चिकित्सकों की टीम ने बच्चे का ऑपरेशन किया।

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बच्चे की हालत अभी क्रिटिकल
चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे की हालत अभी क्रिटिकल है। दुबारा किए ऑपरेशन के बाद सुबह ही उसे वेन्टिलेटर से हटाया गया। उसके स्वास्थ्य में अब लगातार सुधार हो रहा है। उसे अभी सांस लेने में तकलीफ है। चिकित्सकों की टीम लगातार उसे देख रही है।
पत्रिका से पता चलते ही बुलाई थी बैठक
सीडब्ल्यूसी टीम ने बताया कि राजस्थान पत्रिका में खबर प्रकाशन बच्चे के बारे में जानकारी मिली तो एक बाद सभी चौंक पड़े। न्यायपीठ ने आपात बैठक कर तुरंत प्रसंज्ञान लेते हुए अस्पताल के दौरे का निर्णय लिया था। बच्चे के हालत के बारे में एचओडी से बात की। टीम ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया है कि बच्चे की विशेष देखरेख के साथ ही किसी तरह की कोई कोताही न बरते।