
बिहार के सिवान जिले में कल्लुआ की रहने वाली पुष्पा ने हिम्मत कर अपनी बहिन की शादी होने से पहले पिता का इलाज तो करवा दिया। उपचार के लिए अभी दो लाख रुपए की और जरूरत होने से उसकी हिम्मत जवाब दे रही है। बीमारी से लाचार पिता के उपचार के लिए अब उसे भामाशाहों से सहयोग की उम्मीद है।
शहर के गीतांजलि अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग की गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती बिहार के राधेश्याम कुशवाह करीब तीस साल से आबूरोड के आकराभट्टा में रह रहे हैं। मजदूरी कर उन्होंने अपनी पांच बेटियों में से तीन की शादी करवाई। चौथी बेटी की 10 जून की होने वाली शादी के लिए तैयारियां कर रहे थे। इस बीच,15 मई को राधेश्याम को हार्ट अटैक आया। पुष्पा उन्हें उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल में ले गई। दूसरे नंबर की बेटी पुष्पा अपने पति के साथ ही पिता के पास रह रही थी। आठ दिन उपचार के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। परिचितों के कहने पर पुष्पा पिता के मना करने के बावजूद उपचार के लिए उदयपुर ले आई। सरकारी अस्पताल में सही सलाह नहीं मिलने पर वह पिता को 25 मई की गीतांजलि अस्पताल में गई, जहां 30 मई को उनका ऑपरेशन हुआ। उसने शादी में खर्च के लिए रखे रुपए तथा अन्य परिचितों से मिले सहयोग से दो लाख रुपए उपचार के लिए जमा करवा दिए। अब करीब दो लाख रुपए और खर्च होने की बात सामने आने से पुष्पा के पांव तले जमीन खिसक गई। इसके चलते पुष्पा की निगाहें मददगार को ढूंढ़ रही है।
बेटी की शादी जरूरी इलाज नहीं
राधेश्याम अटैक आने के बाद आगे के उपचार कराने के लिए तैयार नहीं था। वह गांव जाकर अपनी पुत्री खुशबू की शादी में शरीक होना चाहता था, लेकिन पुष्पा ने हौसला रख कर इलाज करवाया।
Published on:
02 Jun 2017 02:22 pm
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