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सरकारी कुर्सी पर `महकमे के दामाद’

- संभाग के सबसे बडे़ महाराणा भूपाल हॉस्पिटल में वर्षों से जमे हैं ये कार्मिक - ना कोई हटाने का नाम लेता है और ना ही कभी कोई सवाल  

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- संभाग के सबसे बडे़ महाराणा भूपाल हॉस्पिटल में वर्षों से जमे हैं ये कार्मिक

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. कुर्सी भले ही सरकारी हो, लेकिन ये कार्मिक इस महकमे के तो दामाद ही कहे जाएंगे। ये कार्मिक इन कुर्सियों पर अंगद के पैर की तरह चिपके हुए हैं। हालात ये है कि ना तो इन पर कोई सवाल उठाता है और ना ही उनके अधिकारी ही कभी उन्हें इस कुर्सी से दूसरी कुर्सी पर बिठाने की हिम्मत कर पा रहे हैं। समझ से ये भी परे हैं कि आखिरकार ऐसा भी क्या है कि ये कार्मिक अपनी इस कुर्सी को स्थाई मान बैठे हैं, वहीं इन कार्मिकों से अधिकारियों का ऐसा कौन सा उल्लू सीधा हो रहा है कि वे उन्हें कभी हटाना ही नहीं चाहते। बात यहां संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल हॉस्पिटल की हैं, जहां कार्मिक सभी सरकारी नियमों को ताक में रख मनमर्जी से कुर्सियों पर जमे हुए हैं।

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15 से लेकर तीन साल से अधिक हो गए इन कार्मिकों कोकहने को ये बैक ऑफिस संभालते हैं, लेकिन ये तो इनकी धमक या लालच की चमक ही कही जाएगी कि कोई भी कर्मचारी नेता से लेकर अधिकारी या स्थानीय जनप्रतिनिधि ही इनकी कुर्सियों को बदलने तक की बात करता है।

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महाराणा भूपाल हॉस्पिटल के हाल

ये वे कार्मिक हैं, इनमें से इक्के दुक्के को छोड़ दिया जाए तो सभी सरकारी नियमों के इतर मनमर्जी से एक ही कुर्सी पर वर्षों से जमें हुए हैं, आखिरकार इन्हें कोई हटा क्यों नहीं पा रहा, ये पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल है। क्या यहां आकर सारे कायदे कानून हवा हो जाते हैं।ये है यूडीसी:

- गोविन्द पारिख- लेखा शाखा 15 साल से कार्यरत- प्रिंस थोमस- क्रय शाखा- 15 साल से कार्यरत, केवल छह माह के लिए हटे और फिर आ चिपके

- जगदीश सुखवाल- क्रय शाखा- 7 साल से कार्यरत- अनिलदास- आरटीआई, जनसुनवाई शाखा- 3 साल से कार्यरत

- डिम्पल चौधरी- ट्रेनिंग सेंन्टर- तीन साल से अधिक समय

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एलडीसी- महेन्द्रसिंह गहलोत- स्थापना शाखा - तीन साल से अधिक समय से कार्यरत

- दीपक लक्षकार- भंडार- 4 साल से अधिक समय- गौरव परिहार- सामान्य शाखा- 5 साल से कार्यरत

- मानसी द्विवेदी- बिल शाखा- 4 साल से- आनन्द कुंजमोव- लेखा शाखा- तीन साल से अधिक समय

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फार्मासिस्ट करणसिंह, स्टोर- करीब 10 साल से कार्यरत

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मलाईदार पोस्ट: एमबी हॉस्पिटल में एक जुमला है मलाईदार पोस्ट का। यहां हाल ऐसे हैं कि नए बाबुओं की पोस्टिंग के बाद भी पुराने बाबू केवल चांदी कूटने के लिए अपनी कुर्सी छोड़ना नहीं चाहते। निविदा शर्तों को तोड़ना मरोडना हो या कही कोई बिल सेट करने हो तो इन बाबुओं को महारत हासिल है, ऐसे में अधिकारी भी नहीं चाहते कि इन्हें यहां से डिस्टर्ब किया जाए, आखिर सब कुछ संभालते भी तो ये ही हैं।

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मेरे अधीक्षक कार्यकाल में मैंने दो बार बदलाव किया है। फिर भी यदि कोई लांग स्टे हैं, तो इसे तत्काल हटाया जाएगा, कई बार कुछ कार्य सभी को आसानी से समझ में नहीं आते, इसलिए ऐसे कार्मिकों को हटाने में परेशानी रहती है। हालांकि ज्यादा समय से जो एक ही जगह कार्यरत हैं, उन्हें जल्द से जल्द हटाएंगे।

डॉ. आरएल सुमन, अधीक्षक, महाराणा भूपाल हॉस्पिटल, उदयपुर