
farmer unique protest in udaipur (Patrika Photo)
farmer unique protest in udaipur: उदयपुर जिले में यूरिया खाद की भारी किल्लत को लेकर किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर अनोखे अंदाज में फूट पड़ा। मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने कृषि विभाग कार्यालय के बाहर ऐसा विरोध प्रदर्शन किया, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया।
किसानों ने जहां गधों को गुलाब जामुन खिलाकर व्यवस्था पर तंज कसा। वहीं, यूरिया खाद के बैग को ‘मृत’ मानते हुए उसकी तस्वीर पर फूल-मालाएं चढ़ाकर सांकेतिक श्रद्धांजलि भी दी। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
किसानों का कहना है कि फसलों के लिए इस समय यूरिया बेहद जरूरी है। लेकिन पिछले 40 से 45 दिनों से जिले में खाद की भारी कमी बनी हुई है। किसान घंटों लंबी कतारों में खड़े रहते हैं, इसके बावजूद उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही। कई जगह तो हालात इतने खराब हैं कि किसानों को लॉटरी के जरिए खाद बांटनी पड़ रही है। उदयपुर जिले में चार लाख से ज्यादा किसान इस समस्या से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के संयोजक विष्णु पटेल ने आरोप लगाया कि यूरिया की कालाबाजारी अधिकारियों की मिलीभगत से हो रही है। सरकार ने एक बैग की कीमत 277 रुपए तय कर रखी है, लेकिन किसानों से 450 से 500 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी लाइसेंस प्राप्त गोदामों में जानबूझकर कम खाद भेजी जा रही है। जहां एक गोदाम पर 150 बैग पहुंचने चाहिए, वहां केवल 100 बैग दिए जा रहे हैं और बाकी खाद कालाबाजारी के जरिए बाजार में बेची जा रही है।
किसानों का यह भी आरोप है कि एक किसान को जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल रही। कई बार सिर्फ दो बैग दिए जाते हैं, जबकि रिकॉर्ड में 8 से 10 बैग चढ़ा दिए जाते हैं। किसानों के मोबाइल पर खाद उठाव से जुड़े मैसेज तक नहीं आ रहे हैं, जिससे पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब पुलिस ने गधों को वहां से हटाने की कोशिश की। पुलिस का कहना था कि जानवरों के साथ अत्याचार किया जा रहा है, जिस पर किसानों और पुलिस के बीच बहस हो गई। हालांकि, इसके बाद भी किसानों ने अपना विरोध जारी रखा और कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सुधीर वर्मा को ज्ञापन सौंपा।
सह-संयोजक मदनलाल डांगी ने मांग की कि खाद वितरण की व्यवस्था को राशन वितरण प्रणाली की तरह किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार के पास किसानों की जमीन, फसल और उत्पादन से जुड़ा पूरा डाटा मौजूद है, फिर भी हर रबी और खरीफ सीजन में खाद की किल्लत क्यों होती है, यह बड़ा सवाल है। समिति ने मांग की है कि खाद वितरण के लिए समितियां बनाई जाएं, पॉश मशीन से हर खरीद की स्लिप दी जाए और किसानों को उनकी कृषि भूमि के आधार पर ही खाद उपलब्ध कराई जाए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही यूरिया की आपूर्ति सुचारू नहीं की गई और कालाबाजारी पर रोक नहीं लगी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इससे पहले भी समिति के पदाधिकारी जिला कलेक्टर और एसडीएम को ज्ञापन सौंप चुके हैं। किसानों का कहना है कि अगर समय पर खाद नहीं मिली तो फसलें बर्बाद हो जाएंगी।
Published on:
06 Jan 2026 03:33 am
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