
सूचना प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी के दौर में जहां दिनोंदिन कम्प्यूटर पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, वहीं सरकार की अनदेखी से बच्चे कम्प्यूटर शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। पूर्व में चिह्नित सरकारी स्कूलों में कम्प्यूटर लगाए गए थे, जो योजना के बंद होने से धूल फांक रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा को एेच्छिक व अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है लेकिन इसके लिए शिक्षा विभाग में कम्प्यूटर शिक्षक का पद नहीं है। एेसे में छात्रों को विद्यालय में अन्य विषयों के अध्यापक ही कम्प्यूटर के बारे में अपने सामान्य ज्ञान से खानापूर्ति पूरी कर रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि शिक्षा विभाग ने एक निजी कंपनी को अधिकृत करते हुए सभी शिक्षकों के लिए बेसिक ट्रेनिंग अनिवार्य की थी। एेसे में सरकारी विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा का जिम्मा विद्यालयों के अन्य अध्यापकों को दे दिया गया। जिन विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा है, वहां पर कक्षा नवीं व दसवीं में प्रतिदिन दो पीरियड़ लगते हैं। गत शैक्षणिक सत्र से ही क्लेट योजना का शोर मचा है मगर इस पर अमल नहीं हुआ है। शिक्षा विभाग ने राज्य सरकार को वर्ष 2016 में कम्प्यूटर शिक्षक पद की स्वीकृति के लिए पत्र प्रेषित कर रखा है। बाद में विभाग ने सरकार को कई बार स्मरण पत्र भी लिखे, लेकिन अभी तक इसको लेकर कोई स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
Published on:
09 Aug 2017 06:07 pm
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