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मक्का की फसल में रोग, किसानों की नींद उड़ी

फॉल आर्मी वर्म कीट की दस्तक : वल्लभनगर के 95 हजार बीघा में प्रकोप

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disease in corn crop

मक्का की फसल में रोग, किसानों की नींद उड़ी

मेनार. (उदयपुर). कोरोना महामारी के बीच किसानों की परेशानी रुकने का नाम नहीं ले रही है। कभी तेज हवा तूफान से आड़ी पड़ रही फसलें तो कभी कम बारिश की मार झेल रहे किसान अब फिर से संकट में घिर गए हैं। वल्लभनगर क्षेत्र में इस साल 2 चरणों में बोई करीब 95 हजार बीघा मक्का की फसल में इन दिनों फॉल आर्मी वर्म कीट ने किसानों की नींद उड़ा दी है। मक्का की फसल में आर्मी वर्म के हमले से भारी नुकसान हो रहा है। कृषि विभाग ने भी मक्का की फसल में फॉल आर्मी वर्म कीट की पुष्टि की है। वल्लभनगर विधानसभा क्षेत्र में मक्का की फसल को 2 चरणों में बोया गया है। क्योंकि अधिकांश इलाक़ों में बारिश देरी से हुई थी। क्षेत्र में फॉल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप देरी से बोई फसल में अधिक नुकसान पहुंचा रहा है। वल्लभनगर के मेनार, बामनिया, खेड़ली, नवानिया, रुंडेड़ा, छपरा, बांसड़ा, केदारिया, कुंथवास, अमरपुरा खालसा, बरोड़ीया, खेरोदा आदि गांवों में फसल रोग की चपेट में है। ये कीट मक्के के तने को खोखला कर रहा है। उक्त कीट मक्का फसल की पत्तियों को खाते हैं एवं पोंगली के अंदर रहकर नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे मक्का की फसल बर्बाद हो रही है। ऐसे में किसानों के चेहरे अब मायूस नजर आ रहे हैं। यह भी सामने आया है कि शुरुआत में बारिश की कमी से फसलों की वृद्धि नहीं हो पा रही थी । जिसकी वजह से फॉल आर्मी वर्म कीट को पनपने का पूरा मौका मिल गया था। दरअसल पिछले दिनों एकाएक बरसात थमने के चलते मक्का सहित अन्य कुछ फसलों को नुकसान पहुंचा है। जबकि अब मक्का फसलों पर फाल आर्मी वर्म का प्रकोप छा गया है। फाल आर्मी वर्म के कीट मक्का फसलों को तेजी से चट करने में जुटे हुए है।
किसानों ने शुरू किया छिड़काव: फसलों में रोग को बेलगाम देख किसानों ने दवाओं का छिड़काव शुरू कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर किसान अब खेतो में दवा का छिड़काव कर रहे है।
पत्तियों को खाते हुए गाले में घुस रही
बारिश में लम्बा गैप और वातावरण में नमी के कारण फॉल आर्मी वर्म कीट को बढऩे के लिए पर्याप्त माहौल मिल जाता है। छोटी लार्वा पौधों की पत्तियों को खुरचकर खाती है, जिससे पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे लार्वा बड़ी होती है, पौधों की ऊपरी पत्तियों को खा जाती है और लार्वा बड़ा होने के बाद मक्का के गाले में घुसकर पत्तियां खाती रहती हैं। पत्तियों पर बड़े गोल-गोल छिद्र एक ही कतार में नजर आते हैं ।
ऐसे करें इस रोग से बचाव
ब्लॉक भींडर के कृषि अधिकारी मदन सिंह शक्तावत कहना है कि कीट की रोकथाम के लिए किसान डेढ़ महीने की फसल में इमा मैथिन बेंजोयड 6 ग्राम दवा को 15 लीटर पानी में मिलाकर घोल बनाकर छिडक़ाव करें। किसान एक बीघा के खेत मे अधिकतम 70 से 75 लीटर घोल का छिड़काव करें । इससे ये रोग खत्म हो जायेगा। दवाई छिड़काव के बाद 7 से 10 दिन तक मवेशी को उस खेत का चारा नहीं खिलावे।