Diwali 2022, Dhanteras रूप चौदस के साथ ही 24 को मनाई जाएगी दीपावली, ग्रहण के कारण 25 को नहीं होंगे मांगलिक कार्य, गोवर्द्धन पूजा 26 को, 27 को भाईदूज मनेगी
Diwali 2022 दीपावली का पांच दिवसीय उत्सव इस बार 5 नहीं बल्कि 6 दिन का होगा। इस साल धनतेरस की तिथि और सूर्य ग्रहण के कारण पर्व के दिन में बढ़त हो गई है। ज्योतिषविदों के अनुसार, धनतेरस तिथि 22 अक्टूबर शाम से शुरू होकर 23 शाम तक रहेगी। ऐसे में 22 और 23 दोनों ही दिन धनतेरस मनेगी। इसके बाद रूप चौदस और दीपावली एक ही दिन 24 अक्टूबर को मनेगी, जबकि दीपावली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतराल रहेगा।
ज्योतिषविदों के अनुसार, धनतेरस शनिवार शाम 6.02 बजे शुरू होकर रविवार शाम 6.03 बजे तक रहेगी। ऐसे में दोनों दिन धनतेरस का पूजन किया जाएगा, वहीं खरीद भी की जा सकेगी। इसके बाद 24 को चतुर्दशी युक्त अमावस्या में दीपावली का पर्व मनाया जाएगा, वहीं 25 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा व अन्नकूट के दिन खण्डग्रास सूर्यग्रहण होगा। ऐसे में ये पर्व अगले दिन 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को भाईदूज होगी।
ये रहेगा मुहूर्त समय
पंचांगों में मतभेद और तर्कतिथि को लेकर पंचांगों में भी मतभेद है। मेवाड़ विजय पंचांग ने शनिवार को ही धन तेरस बताई, जबकि निर्णय सागर आदि पंचांगों ने रविवार को बताई है। पंडित डॉ. व्यास बताते हैं कि धन तेरस का महत्व यमदीप दान होता है। आयु, आरोग्य को उत्तम और अकाल मृत्यु टालने के लिए यम का दीप जलाकर आराधना की जाती है। यह शनिवार शाम को ही करना श्रेष्ठ रहेगा।
धन तेरस पूजा
पंडित डॉ. भगवती शंकर व्यास ने बताया कि धनतेरस शनिवार 22 अक्टूबर शाम 6.03 बजे शुरू होगी। इसी दिन भूमि पूजन और रात्रि को धनतेरस पूजन होंगे। अगले दिन रविवार शाम 6 बजे तक धनतेरस रहेगी। इस दिन व्यावसायिक प्रतिष्ठान, औद्योगिक स्थल में पूजा की जाएगी। शनिवार को पूजन के लिए सुबह 8.04 से 9.28 बजे, अभिजीत समय 11.54 से 12.39 बजे, लाभ-अमृत समय 1.40 से 03.04 बजे तक पूजन होगा। रविवार सुबह लाभ-अमृत काल में 9.28 से 12.16 बजे, शुभ काल में 1.40 से 3.04 बजे तक पूजन कर सकेंगे।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त
ज्योतिषचार्य पंडित अलकनंदा शर्मा ने बताया कि शाम गोधूलि प्रदोष वेला में और शाम 5.58 से 8.33 तक शुभ मंगल रहेगा एवं स्थिर संज्ञक लग्न अनुसार, वृष लग्न वेला शाम 7.14 से 9.11 रात्रि पर्यंत और अद्धर्रात्रि में सिंह लग्न वेला में रात्रि 1.42 से 3.57 पर्यंत तक इस लग्न विशेष में कनकधारा स्त्रोत का पठन-पाठन विशेष श्रीकारक होता है। सामान्य लग्न विशेष में वृश्चिक लग्न प्रात: 8.34 से 10.51 तक और कुंभ लग्न दिवा 2.38 से 4.08 पर्यंत का समय अनुसार पूजन किया जा सकता है।