
उदयपुर . प्रदेश के चिकित्सा विभाग पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रदेश भर के करीब 10 हजार चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर 29 अक्टूबर को जयपुर में अधिवेशन की तैयारी कर रहे हैं। इससे पूर्व उनके सामूहिक इस्तीफे के लिए तय प्रारूप में हस्ताक्षर एकत्र किए जा रहे हैं। सरकार उनकी मांगों को लेकर हठधर्मिता नहीं छोड़ती है तो सभी चिकित्सक 6 नवम्बर को एक साथ इस्तीफा सौंपेंगे। दूसरी ओर करीब 40 दिन से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के कर्मचारी प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर मांगों को लेकर धरने पर डटे हुए हैं। इसके चलते विभागीय कामकाज लगभग ठप हो गया है। इससे विभाग की सभी व्यवस्थाएं चरमराती जा रही हैं लेकिन सरकार कुछ नहीं कर रही है।
इधर, विभाग के प्रमुख शासन सचिव नवीन जैन लिखित में मान चुके हैं कि कार्मिकों की हड़ताल से आवश्यक जानकारी केंद्र सरकार तक नहीं पहुंच सकी है। इसके चलते विभाग को मिलने वाला आवश्यक बजट प्राप्त करने में दिक्कतें आ सकती हैं। इधर, हालातों को गहराई से देखें तो केंद्र सरकार की बहुउद्देशीय योजनाओं में शामिल जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई), प्रदेश सरकार की फ्लेगशिप योजना में शामिल ‘राजश्री’ का अकेले उदयपुर जिले में करोड़ों रुपए का भुगतान अटका हुआ है। विभाग की सभी व्यवस्थाएं चरमराती जा रही हैं मगर सरकार की ओर से कोई पहल नहीं हो रही है।
पूरे हैं प्रयास
विभागीय व्यवस्था को बनाए रखने के पूरे प्रयास हो रहे हैं। कर्मचारियों की कमी एवं विरोध के चलते कामकाज प्रभावित होने से इनकार नहीं कर सकता, लेकिन उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार व्यवस्था संचालन को प्रमुखता दी जा रही है।
डॉ. संजीव टाक, सीएमएचओ, उदयपुर
Published on:
28 Oct 2017 04:27 pm
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