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हठधर्मिता ऐसी कि आदेश पर आदेश, लेकिन कुर्सी के मोह पर सारे कायदे कुर्बान

- अब तक आरएनटी मेडिकल कॉलेज में कुर्सियाें से नहीं हट पाए बाबू

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इसे हठधर्मिता ही कहेंगे कि सारे नियम कायदे इन कुर्सियों तक आकर धरे रह गए। मामला आरएनटी मेडिकल कॉलेज में अर्से से कुर्सियों पर जमे बाबुओं का है। कई सालों से उन्होंने इन पर मानो अपना हक ही जमा लिया। आरएनटी मेडिकल कॉलेज में कई ऐसे बाबू हैं, जो बरसों से एक ही सीट पर काम कर रहे हैं, नियमानुसार एक ही सरकारी कुर्सी पर तीन साल से ज्यादा काम नहीं किया जा सकता है, लेकिन यहां सारे नियम हवा में हैं।

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पूर्व प्राचार्य ने निकाला आदेश - नए आए...इसी बीच कागज गायबपूर्व प्राचार्य डॉ. लाखन पोसवाल ने सभी बाबुओं की कुर्सियों को बदलने के आदेश जारी कर दिए थे, इसी बीच उनका कार्यकाल पूरा हो गया। ऐसे में नए प्राचार्य के रूप में डॉ विपिन माथुर ने कार्यभार संभाला, लेकिन वह पारिवारिक कारणों से अवकाश पर रहे, ऐसे में अब तक अपनी शैली के अनुसार ना बाबू हट पाए हैं और ना ही इसकी पूरी समीक्षा ही हो पाई। डॉ पोसवाल की ओर से जारी आदेश को ही जैसे गायब कर दिया गया। ये आदेश फिलहाल किसी भी फाइल में नहीं मिल रहा।

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20-20 साल हो गए जमे हुए

यहां कई ऐसे मंत्रालयिक कर्मचारी हैं, जो 20 वर्ष तक से अपनी कुर्सी पर जमे हुए हैं। खास बात ये है कि अधिकांश कार्मिक लम्बे समय से वित्तीय कार्य से जुड़े हुए हैं। यहां 39 ऐसे कार्मिक हैं, जो महाविद्यालय के एक अनुभाग में तीन वर्ष से अधिक समय से कॉलेज में कार्यरत हैं।

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कौन कब से जमे हैं ...

- ललित कुमार सेठ, अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी - 7 वर्ष से लेखा शाखा- विनोद पालीवाल - गेम्स रिकॉर्ड शाखा में 12 वर्ष से

- प्रकाशचन्द्र पांडे - अराजपत्रित - वेतन बिल में 7 वर्ष से- मानालाल डांगी - बजट शाखा में दस वर्ष से

- परिक्षितसिंह झाला- पीएसएम विभाग में 15 वर्ष से- चेतना आचार्य- विद्याथीZ शाखा में 5 वर्ष से

- मोनिका शर्मा - एफवीसी बिल में 9 वर्ष से- हंसमुख आमेटा - स्टोर में 7 वर्ष

- बाबूलाल खटीक - केस शाखा में 4 वर्ष से- इन्द्र मल आचार्य - मेडिसिन विभाग में 4 वर्ष से

- नन्दुकंवर- क्रय शाखा में तीन वर्ष से- ओमप्रकाश माली - पुस्तकालय में 6 वर्ष से

- निधि- नियुक्ति शाखा - 5 वर्ष- रेहाना हबीब- क्रय शाखा - 8 वर्ष

- दिनेशकुमार दरोगा- विद्याथ्र्ी शाखा - 9 वर्ष- रवि पालीवाल- स्टाईफंड सीएएस पीजी - 3 वर्ष

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हम सभी की लिस्ट बनवा रहे हैं, जैसे ही प्राचार्य फिर से ज्वाइन करते हैं, तत्काल लम्बे समय से जमे बाबुओं को हटाया जाएगा, पूर्व में भी इस पर चर्चा हो चुकी है।

डॉ कुशल गहलोत, उपाचार्य आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर