
एकलिंगजी के मिर्ची बड़े खाने का लुत्फ तो उठा ही चुके होंगे लेकिन क्या कैलाशपुरी मार्ग, भुवाणा के पकोड़ों का स्वाद कभी लिया है। यदि नहीं तो भुवाणा जाकर इनका स्वाद जरूर लीजिएगा। इनकी खासियत यह है कि ये पकोड़े केवल जगह के नाम से ही जाने जाते हैं। यानी भुवाणा के मिर्ची के पकोड़े। दुकान का कहीं कोई नाम नहीं है। बस, पकोड़ों का स्वाद ऐसा लाजवाब है कि ये कई सालों से भुवाणा के मिर्ची के पकोड़ों के नाम से ही मशहूर हैं। पकोड़े बनाने वाले नारायण लाल मेनारिया ने बताया कि करीब 75 सालों से उनकी पकोड़ों की दुकान है। वे जब महज 10 साल के थे तब पिताजी उदयलाल मेनारिया के साथ दुकान पर मिर्ची के पकोड़े बनाना सीखा करते थे। तब 1 रुपए में 10 पकाेड़े बेचते थे और बाद में जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती गई, वैसे-वैसे पकोड़े कम होते गए। अब 10 रुपए के 5 पकोड़े देते हैं। मेनारिया बताते हैं कि आज तक दुकान का कोई नाम रखने की जरूरत ही नहीं पड़ी, उनके पास ग्राहक खुद-ब-खुद ही आ जाते हैं। किसी तरह का कोई प्रचार-प्रसार नहीं हुआ।
----------------------एक पैर खोने के बावजूद नहीं मानी हार
नारायणलाल मेनारिया ने बताया कि उनका घर भुवाणा में ही है। वे परिवार के साथ रहते हैं। बेटा खेती करता है। शाम को उनके साथ पकोड़े बनाने में मदद करता है। वे शाम को 6 से 8 बजे तक ही पकोड़े बनाने का काम करते हैं। इस दौरान वे करीब 1000 पकोड़े बना लेते हैं। केवल रविवार और सोमवार को अधिक लोगों के आने से वे 500-600 पकोड़े ऊपर बनाते हैं। मेनारिया बताते हैं कि वर्ष 1983 में खेत से आते समय वे एक दुर्घटना का शिकार हो गए, जिसमें उन्होंने अपना एक पैर खो दिया। इसके बाद वे काफी निराश भी हुए लेकिन कृत्रिम पांव के बाद उन्हें काफी सहारा मिला। उन्होंने दुकान पर फिर आना-जाना शुरू किया और पूरी तरह इसी काम में लग गए।
Updated on:
26 Feb 2023 01:15 pm
Published on:
26 Feb 2023 12:50 pm
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