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राजस्थान के इस आदिवासी गांव में बेटियाें की फुटबॉल टीम, मिलिए इस टीम की इन फुटबॉलर गर्ल्स से…

फुटबॉल विलेज जावर में अब आदिवासी बेटियाें की फुटबॉल टीम, मैसी और रोनाल्डी की हैं फैन, पहली बार बनी लड़कियों की टीमें, महिला फुटबॉल लीग का आयोजन, पढ़ाई के साथ मैदान में सुबह-शाम बहाती है पसीना, देश के लिए खेलने का जज्बा

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मधुलिका सिंह/उदयपुर. जिले के फुटबॉल विलेज से पहचाने जाने वाले जावर माइंस में फुटबॉल का क्रेज सालों से चला आ रहा है। आदिवासी क्षेत्र में अब तक लड़कों को ही फुटबॉल खेलते देखा गया है, लेकिन अच्छी बात यह है कि अब यहां की बेटियां भी फुटबॉल खिलाड़ी बनने का जज्बा दिखा रही है। इनका सपोर्ट घरवाले भी कर रहे हैं। फुटबॉल टीमें तैयार हो चुकी हैं और लीग मैच हर 3 माह में कराए जा रहे हैं। प्रशिक्षण पाकर बेटियों में आत्मविश्वास की एक अलग ही चमक दिखती है और उन्होंने इस खेल में अपने सुनहरे भविष्य के सपने भी संजो लिए हैं।

आदिवासी जन सेवा समिति के संरक्षक अमित खराड़ी ने बताया कि जावर क्षेत्र फुटबॉल में मिनी ब्राजील कहा जाता है, यहां सालों से मोहन कुमार मंगलम फुटबॉल टूर्नामेंट होता आया है और यहां के लोगों के रग-रग में फुटबॉल बसा है, वे चाहे महिला हो या पुरुष। पहली बार 30 लड़कियों की 3 फुटबॉल टीमें का महिला फुटबॉल लीग आयोजन किया गया। स्कूल जाती इन बालिकाओं को जिंक की ओर से प्रशिक्षण दिया जा रहा है, लेकिन अभी यह काफी नहीं है। इनको और सीखने की जरूरत है। टीम में शामिल कल्पना पारगी, दीपा मीणा, गीत मीणा, बिंदु मीणा, सोनिया मीणा, अंजलि मीणा, दिव्या कुमारी, बिंदिया, रंजना आदि सभी लड़कियां जावर, टीडी और नेवा तलाई गांव की है। ये सुबह और शाम को प्रशिक्षण लेती हैं।

बेटियों को प्रोत्साहन मिले तो बढ़े आगे

खराड़ी ने बताया कि गांव में ग्राउंड की कमी के कारण कुछ लड़कियां ही अभ्यास कर पा रही हैं। जनजाति विकास विभाग (टीएडी) को चाहिए कि आयोजन को बढ़ावा देने के लिए सहयोग करे। मैदान की व्यवस्था और लड़कियों को खेल सुविधा दे। जावर माइंस में जिस तरह से लड़कों की फुटबॉल एकेडमी की व्यवस्था है उसी तरह से लड़कियों की भी होनी चाहिए। उसमें भी स्थानीय को प्राथमिकता दी जाए। अभी स्थानीय लडकों को भी फुटबॉल एकेडमी में मौका नहीं मिल पा रहा है।

मैसी, रोनाल्डो की फैन है बेटियां

मैं फुटबॉल टीम में राज्यस्तर पर खेल चुकी हूं। अब लड़कियों को भी ऐसे गेम्स खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ये बहुत अच्छा है।

गीत मीणा, जावर

मुझे फुटबॉल खेलना बहुत पसंद है। रोनाल्डो और मैसी का गेम पसंद है। मुझे भी इन जैसा खिलाड़ी बनना है।

बिंदिया मीणा, जावर

मैं 9वीं कक्षा में पढ़ती हूं और फुटबॉल खेलना भी अच्छा लगता है। यहां हर घर में फुटबॉल खिलाड़ी हैं। अभिभावक भी बेटियों को सपोर्ट करते हैं।

दीपा मीणा, जावर

मैं फुटबॉलर मैसी को आदर्श मानती हूं। इस बार 10वीं बोर्ड की चुनौति है, लेकिन मैं अपनी पढ़ाई बिना प्रभावित किए फुटबॉल भी खेलती रहूंगी।

वर्षा मीणा, टीडी