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Rajasthan: लग्जरी होटल के बाथरूम में थे कपल, बिना नॉक किए ‘मास्टर की’ लगाकर अंदर घुस आया वेटर, लगा जोरदार झटका

उदयपुर के एक नामचीन होटल को निजता उल्लंघन मामले में चेन्नई उपभोक्ता आयोग ने दोषी ठहराते हुए 10 लाख रुपए हर्जाने का आदेश दिया। हाउसकीपिंग स्टॉफ मास्टर की से कमरे में घुसा था। आयोग ने किराया ब्याज सहित लौटाने और 10 हजार खर्च देने को कहा।

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Rajasthan Waiter Unlocks Luxury Hotel Bathroom With Master Key Without Knocking Couple Left Stunned Inside

लग्जरी होटल के बाथरूम में थे कपल (पत्रिका क्रिएटिव इमेज)

उदयपुर: झीलों की नगरी उदयपुर के एक मशहूर होटल को निजता के उल्लंघन और सेवा में कमी का दोषी पाया गया है। चेन्नई की एक उपभोक्ता अदालत ने होटल प्रबंधन को एक दंपत्ति की निजता भंग करने के आरोप में 10 लाख रुपए का हर्जाना भरने का आदेश दिया है।

यह मामला तब सामने आया, जब होटल के हाउसकीपिंग स्टॉफ ने मास्टर की का इस्तेमाल कर कमरे में प्रवेश किया, जिसमें मेहमान ठहरे हुए थे और उस वक्त वे बाथरूम में थे।

क्या है पूरा मामला?

'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता चेन्नई निवासी एक वकील हैं, जिन्होंने 26 जनवरी 2025 को उदयपुर के पिछोला झील स्थित होटल में एक दिन के लिए कमरा बुक किया था। इस 'ग्रैंड रूम विद लेक व्यू' का एक रात का किराया 55,500 रुपए था।

शिकायत के मुताबिक, जब महिला और उनके पति कमरे के बाथरूम में थे, तभी अचानक हाउसकीपिंग स्टॉफ का एक सदस्य मास्टर की के जरिए कमरे के अंदर दाखिल हो गया। दंपत्ति ने अंदर से चिल्लाकर 'नो सर्विस' (सेवा की जरूरत नहीं) भी कहा, लेकिन इसके बावजूद स्टॉफ सदस्य अंदर आया और बाथरूम के टूटे हुए दरवाजे के जरिए अंदर झांका। इस घटना से दंपत्ति को गहरा मानसिक आघात पहुंचा और उन्होंने इसे अपनी निजता का गंभीर उल्लंघन माना।

होटल की प्रतिक्रिया से असंतोष

दंपत्ति ने घटना के तुरंत बाद होटल रिसेप्शन पर इसकी शिकायत की, लेकिन उनका आरोप है कि होटल प्रबंधन की ओर से कोई उचित या संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया।

उपभोक्ता आयोग का कड़ा रुख

चेन्नई (उत्तर) जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए होटल प्रबंधन को जमकर फटकार लगाई। आयोग ने अपनी टिप्पणियों में कहा, होटल के आंतरिक नियम किसी मेहमान की निजता और सुरक्षा के मौलिक अधिकार से ऊपर नहीं हो सकते। स्टॉफ ने डोरबेल बजाने के एक मिनट के भीतर ही कमरे में प्रवेश कर लिया, जो कि पूरी तरह से अनुचित है।

आयोग ने पाया कि होटल अपना 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' पेश करने में विफल रहा, जिससे स्टॉफ की ट्रेनिंग और शिष्टाचार पर सवाल उठते हैं। आयोग ने यह भी नोट किया कि कमरे के बाहर लगा सीसीटीवी कैमरा काम नहीं कर रहा था और फुटेज देने में भी देरी की गई।

कोर्ट का फैसला: रिफंड और जुर्माना

आयोग ने होटल का संचालन करने वाली कंपनी 'श्लॉस उदयपुर प्राइवेट लिमिटेड' को निम्नलिखित आदेश दिए। निजता के उल्लंघन के लिए 10 लाख रुपए का हर्जाना। कमरे का किराया 55,500 रुपए, 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाना होगा। मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 10,000 रुपए अतिरिक्त देने होंगे।

होटल ने आरोपों को नकारा

दूसरी ओर होटल ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। होटल का तर्क है कि कमरे के बाहर 'Do Not Disturb' का बोर्ड नहीं लगा था। स्टॉफ ने डोरबेल बजाने के बाद ही नियम के तहत कमरे में प्रवेश किया। जैसे ही स्टॉफ को अहसास हुआ कि मेहमान बाथरूम में हैं, वह तुरंत बाहर निकल गया। होटल ने माफीनामा केवल सद्भावना के तौर पर दिया था, इसका मतलब गलती स्वीकार करना नहीं है।