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वन विभाग को लौटानी पड़ी खाते चढ़ी जमीन…विभाग यह भी नहीं बता पाया जमीन उसकी कैसे

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उदयपुर

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Krishna Kumar Tanwar

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Updated: 23 Nov 2018, 6:00 PM IST

Forest department's action

Forest department's action

उदयपुर. जिला कलक्टर के आदेश पर कब्जे में लगी गई जमीन को लेकर वन विभाग न्यायालय में यह भी नहीं बता पाया कि यह जमीन उनकी कैसे है? ऐसे में न्यायालय ने अधीनस्थ न्यायालय के फैसले का अपास्त कर वन विभाग के खाते चढ़ी जमीन को पुन: परिवादिया को देने के आदेश दिए।हजारेश्वर महादेव कॉलोनी निवासी श्यामला पत्नी राकेश वर्डिया ने क्षेत्रीय वन अधिकारी, सहायक वन संरक्षक दक्षिण, वन संरक्षक व राजस्थान राज्य जरिए जिला कलक्टर के खिलाफ अपील पेश की। यह अपील सिविल न्यायालय शहर दक्षिण की ओर से 12 दिसम्बर 2008 को पारित निर्णय के विरुद्ध पेश की गई। इसमें बताया कि सीसारमा चुंगी नाका के पास नगरपालिका सीमा में उसके स्वामित्व एवं खातेदारी की काश्तकार जमीन है। 30 बरसों से वह जमीन पर काबिज है। इस जमीन को उसने गिरवी रखकर लोन भी लिया हुआ है। यहां पर सिर्फ आने-जाने का रास्ता है और बाकी हिस्से पर पत्थर की कोट की हुई है। वन विभाग ने जमीन के अंदर अपनी जमीन सम्मिलित होना बताकर उसे कब्जे का नोटिस दे दिया। बाद में जिला कलक्टर के कहने पर यह जमीन वन विभाग के खाते में दर्ज कर कब्जा कर ली गई। जबकि गजट नोटिफिकेशन ही नहीं हुआ। परिवादिया का कहना है कि वन विभाग अब तक यह नहीं बता पाया कि यह जमीन उसकी कैसे है। न्यायालय ने परिवादिया की अपील स्वीकार कर अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को अपास्त कर दिया। इस आदेश से वन विभाग के खाते चढ़ी भूमि पुन: परिवादिया को मिल गई।

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