
मो. इलियास/ उदयपुर . आदिवासियों के फर्जी बीमा क्लेम मामले में बयानों से मुकरी परिवादी पुष्पा ने विधवा पेंशन के कागजों में हस्ताक्षर करवाने की बात कहकर एक बार फिर गुमराह करने का प्रयास किया लेकिन हकीकत में वह नाते चली गई। विधवा पेंशन किसकी बनी और उसके कौनसे कागज पर किसने हस्ताक्षर करवाए? पुलिस ने इस संबंध में पड़ताल कर कई तथ्य जुटाए हैंं।
पुलिस का कहना है कि परिवादी पुष्पा के पति रामा की आरोपितों ने सर्पदंश से मौत बताई थी। पुलिस ने पुष्पा के बयान लेने चाहे तो वह एक बार मुकर गई व बयानों में कहा कि उसने किसी तरह कोई रिपोर्ट नहीं दी। उसकी जगह किसी अन्य ने रिपोर्ट पेश की। उसके खाते में तो बीमा क्लेम के पैसे आ गए। पुलिस ने पड़ताल की तो स्पष्ट हुआ कि रामा की तीन बीमा पॉलिसी हुई थी। कंपनी ने अन्य बीमा पॉलिसियों का उल्लेख कर नोट डालते हुए क्लेम ही पास नहीं किया तो उसके खाते में पैसे किसके आए? उसके बाद पुष्पा ने परिवाद में कहा कि उसके विधवा पेंशन के कागज में हस्ताक्षर करवाए गए थे। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि वह बलीचा नाते चली गई। ऐसी स्थिति में विधवा पेंशन का वह लाभ ले रही थी या नहीं। अभी तक उसे पेंशन मिल रही है। इन सब के बारे में पुलिस ने कई तथ्य जुटाए हैंं।
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका के 30 मार्च के अंक में ‘जिनके खाने के लाले उनके नाम पर उठा लाखों का बीमा क्लेम’ शीर्षक से खबर के बाद नित्य नए खुलासे कई खबरें प्रकाशित की। पुलिस ने जांच के बाद आरोपितों के विरुद्ध चोकडिय़ा (नाई) निवासी पुष्पा पत्नी रामा गमेती की रिपोर्ट पर तथाकथित डॉक्टर मेल नर्स डालसिंह, दलाल रमेश चौधरी, बीमा एजेन्ट दिलीप मेघवाल व पूर्व उपसरपंच शंकरलाल के विरुद्ध मामला दर्ज किया।
पंचायत से आज मिलेगा रिकॉर्ड
पुलिस ने पंचायत से एफआईआर में दर्ज नाम व बीमित परिवारों के तीन-चार पंचायतों से बीपीएल की सूची मांगी है। सूची में बीपीएल बीमित परिवारों की तस्दीक के साथ ही रिकॉर्ड में उनके बीमा भरने की पुष्टि होगी। पुलिस का कहना है पंचायत से संभवत: एक या दो दिन में रिकॉर्ड मिल सकता है।
Published on:
30 Apr 2018 02:35 pm
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