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Independence Day 2020 : स्वतंत्रता सेनानी कनक मधुकर, वीरेन्द्रपाल सिंह बरणा व किशन वर्मा का परिवार आज भी जता रहा अफसोस

जहां रहते थे स्वतंत्रता सेनानी वहां नाम को तरस रहे परिवार, प्रशासन ने कागज ही चलाए, असल में दर्द दूर नहीं किया  

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कनक मधुकर

कनक मधुकर

मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. स्वतंत्रता सेनानियों ने भले ही अंग्रेजों से मुकाबला किया। उनको यहां से खदेड़ा और देश की आजादी और देश को सुरक्षित रखने के लिए जो कुछ किया उनकी कहानी हम किताबों में जरूर पढ़ते है लेकिन आज भी उनके परिवार वाले उनके मान-सम्मान और उनकी कहानी आने वाली पीढ़ी को बताने के लिए कुछ छोटा सा ही चाहते है लेकिन अफसरों ने सिर्फ और सिर्फ फाइलें चलाने के अलावा कुछ नहीं किया। बात उदयपुर के स्वतंत्रता सेनानियों की करें तो उनके परिजन नगर निगम व प्रशासन ने कुछ बड़ा नहीं मांग रहे है लेकिन जो कुछ उनकी याद में होना चाहिए वह भी प्रशासन नहीं कर सका। सबसे बड़ा काम जो संभागीय आयुक्त व जिला कलक्टर को करना है लेकिन किसी ने रूचि नहीं ली। स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार वाले पिछले साल ही तत्कालीन जिला कलक्टर आनंदी से मिले तो उनको यह आस लगी कि कुछ काम हो जाएगा लेकिन आज फिर स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है और स्थितियां जस की तस है।

नामकरण कर पूरी कर दी औपचारिकताएं
असल में नगर निगम की सांस्कृतिक एवं मार्गोँ के नामकरण समिति ने बरसों पहले झीणीरेत चौक का नामकरण कनक मधुकर के नाम, अम्बामाता रोड का नाम वीरेन्द्रपाल सिंह बरणा और मास्टर कॉलोनी अम्बामाता नाम किशनलाल वर्मा के नाम पर करने का निर्णय किया गया। बस इसके बाद से ये सिर्फ कागजों में ही है जिसे क्रियान्वित करने की लम्बे समय से मांग चल रही है लेकिन प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि किसी ने रूचि नहीं दिखाई।

स्वतंत्रता सेनानियों परिवार यह चाहता
स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार चाहते है कि नामकरण तो कागजों में हो गया लेकिन सरकारी रिकार्ड में भी ये क्षेत्र उन स्वतंत्रता सेनानियों के नाम जाने जाए। निगम ने निर्णय तो कर दिया लेकिन अभी तक रिकार्ड में यह सब नहीं हुआ है। इसके लिए संभागीय आयुक्त व जिला कलक्टर के वहां से डाक विभाग को भी उस क्षेत्र के नाम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम जो नामकरण किया गया उससे जाना जाए इसकी प्रक्रिया पूरी करनी थी। इसके अलावा इन तीनों स्थानों पर जितने भी सार्वजनिक स्थान बोर्ड लग रहे है उन पर स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से ही लगाए जाए। इससे उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों और आने वाली पीढ़ी को यह तो पता चल सके कि उनके इस क्षेत्र से भी स्वतंत्रता सेनानी का योगदान उस दौर में रहा।

इनका कहना है...
हमने बहुत प्रयास कर लिए। आजाद देश में जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों ने कोई समाधान नहीं किया। बहुत छोटी सी प्रक्रिया पूरी करने का वक्त भी उनके पास नहीं है और वह भी स्वतंत्रता सेनानियों के लिए, इससे ज्यादा अफसोस की बात क्या होगी। जिनसे मिलतना था उन सबसे मिल लिए लेकिन काम कुछ नहीं हुआ।
- प्रमोद वर्मा, महामंत्री जिला स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन

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