
छोटे से गांव झाड़ोल से निकला सच्चा सपूत कर रहा देश की जल सीमा की सुरक्षा
भुवनेश पंड्या
उदयपुर. बादल ने कभी सोचा नहीं था जिस गांव की सड़कें कच्ची है और जहां तक गिनी चुनी गाडिय़ां पहुंचती है, वहां से निकलकर वह पानी में रहते हुए हवाओं से बातें करेगा। जैसा नाम है वैसा ही उनका काम भी। जिले के झाड़ोल गांव के निवासी बादल सोनी वर्तमान में देश के एकमात्र एयरक्राफ्ट केरियर आईएनएस विक्रमादित्य पर बतौर सीबीआरएन ऑफिसर कार्यरत है। वह एनसीसी की एयर विंग के जरिए यहां तक पहुंचे है। उनका कहना है कि एनसीसी ने उनका जीवन बदल दिया है।
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बादल 2003 से 2006 तक एनसीसी के सिक्स राज एयर स्काउन्ड्रन में रहे। जनवरी 2009 में सेना में ज्वाइन की। आईएनएस विक्रमादित्य में पोस्टेड बतौर ले$िफ्टनेंट कमांडर के सीबीआरएन प्रोटेक्शन ऑफिसर केमिकल, बायो लॉजिकल, न्यूक्लियर एण्ड रेडियो लॉजिकल ऑफिसर के पद पर लगे। यदि शिप पर कोई अटैक होता है, तो उसे बचाने की जिम्मेदारी उनकी रहती है। बादल ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि पिता का सपना था कि वह सेना में जाए, पिता नन्दलाल सोनी गांव में छोटी ज्वैलरी की दुकान करते है। बादल अपने छोटे से गांव से निकले परिवार के पहले ग्रेजुएट थे।
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माता-पिता ने जब कंधे पर सितारे पहनाएं तो लगा हर सपना हो गया पूराबकौल बादल पिता और मां अंजना सोनी ने जब उन्हैं कंधे पर सितारे पहनाएं तो उन्हें महसूस हुआ कि हर सपना पूरा हो गया। वह एनसीसी में ही ऑल इंडिया बेस्ट पायलट बन गए थे। आइएसएस विक्रमादित्य देश का एक मात्र एयरक्राफ्ट केरियर है जहां से लडाकु विमान आते-जाते है। इसका बेस कोट कर्नाटक के कारवाड़ में है। शिप 2013 में रूस से इसे खरीदा था। इस केरियर का काम जल सीमा की सुरक्षा करना है। बादल 34 वर्ष के हैं, और 13 वर्ष की नौकरी हो चुकी है। 2014 में नागपुर में प्रियंका सोनी से विवाह हुआ।
Published on:
27 Jan 2021 06:20 am
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