
आईसीआईसीआई बैंक की भींडर शाखा में गरीब किसानों की योजना में भारी सेंध लगी है। फिलहाल 13 गांवों के 37 किसानों के खातों की जांच शुरू हुई है, लेकिन दावा किया जा रहा है कि इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे होंगे। पुलिस को उम्मीद है कि फर्जीवाड़े में कई नाम सामने आने के साथ आंकड़ा भी बढ़ेगा। गौरतलब है कि जमीनों के फर्जी कागजात से बैंकों से लाखों रुपए लोन लेकर चपत लगाने वाले गिरोह का गुरूवार को भींडर पुलिस ने पर्दाफाश किया गया था। इसी के तहत खुलासे हो रहे हैं।
पुलिस ने बताया कि करेडिय़ा के 14, आकोलाखुर्द के 2, आकोलागढ़ व अरनेड के दो, ब्यावर के 2, आसावरा के 4, चरलिया के एक, झाड़ेली 4, निकुम्भ व भीमलोद के दो, सोडावास के 3, पीपली गुजरान व अमरपुरा (भदेसर) के दो केसीसी खातों को संदिग्ध मानकर उनकी जांच की जा रही है। इन खातों सहित करीब 50 केसीसी खाते पुलिस ने फ्रीज करवाए हैं। फर्जीवाड़ा करने वालों ने गरीब किसानों के नाम से पैसा उठाने के लिए जाल बिछा रखा था।
ऐसे में किसानों के भी उलझने के आसार हैं। दलालों ने फर्जी सरकारी मोहरें बनाई, जबकि बैंक के कर्मचारियों से लेकर बैंक के संपत्ति सत्यापन के वकील तक की भूमिका संदिग्ध है। पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है। पुलिस की गिरफ्त में आए दलाल कालूलाल सुथार ने बताया कि उसने और साथियों ने उपपंजीयक, तहसीलदार, पटवारी, सरपंच आदि की फर्जी मोहरें बना रखी थीं। गिरोह गरीब व कमजोर वर्ग के ऐसे किसानों को ढूंढता, जिन्हें रुपयों की जरूरत हो। उन्हें जाल में फांसकर उनके नाम से केसीसी लोन की फाइल तैयार करते, फिर बैंक के केसीसी कर्मचारी व हेड के जरिए फाइलों को पास करवाकर लोन उठा लेते थे। लोन में से दलाल तो अपना हिस्सा लेते ही थे, कर्मचारियों को भी रुपए मिलते थे। पुलिस अभी ये मोहरें जब्त नहीं कर पाई है।
फतहनगर के वकील की भूमिका भी संदिग्ध
आईसीआईसीआई भीण्डर में सम्पत्ति सत्यापन के लिए नियुक्त वकील फतहनगर निवासी शैलेश पालीवाल की भूमिका भी पुलिस को संदिग्ध लग रही है। थानाधिकारी हिमांशुसिंह ने बताया कि शैलेश सभी लोन फाइलों की संपत्तियों का वेरिफिकेशन करता था। फर्जी दस्तावेजों वाली फाइलें भी उसी ने ओके की थीं।
इस टीम ने किया काम
ब्रांच मैनेजर की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एसपी राजेन्द्र प्रसाद गोयल ने एएसपी-ग्रामीण चन्द्रशील ठाकुर तथा वल्लभनगर डीएसपी घनश्याम शर्मा के निर्देशन में भीण्डर थाने की टीम बनाई थी। इसमें थानाधिकारी राजावत के नेतृत्व में एएसआई लालशंकर मीणा, हेड कास्टेबल उम्मेदराम, कास्टेबल रामप्रताप विश्नोई, राजूराम विश्नोई, हिंगलाजदान, रघुवीरप्रसाद शामिल थे।
पहले भी कई बैंकों में किए खेल
कालूलाल ने कबूल किया कि आईसीआईसीआई से पहले उसने एसबीआई की मंगलवाड़ (चित्तौडग़ढ़) व चिकारड़ा (चित्तौडग़ढ़) सहित कई अन्य शाखाओं में भी इसी तरह केसीसी लोन उठवाया है। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में 10 प्रकरण दर्ज हैं।
Published on:
09 Sept 2016 05:10 pm
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