
उदयपुर/पत्रिका। साहित्यकारों व लेखकों के लिए अच्छी खबर है, यदि साहित्य अकादमी के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो अकादमी की ओर से दिए जाने वाले पुरस्कारों की राशि में अब दस गुना बढ़ोतरी हो सकती है। राजस्थान साहित्य अकादमी के अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने इसके लिए मुख्यमंत्री से मांग की है। ये मांग पूरी होने पर राजस्थान में भी साहित्य अकादमी के पुरस्कारों की राशि अन्य राज्यों के समकक्ष हो जाएगी। प्रदेश में ये बढ़ोतरी ग्यारह साल बाद होगी। पुरस्कार राशि में अंतिम बढ़ोतरी वर्ष 2012 में हुई थी। उल्लेखनीय है कि अकादमी का पचहत्तर हज़ार रुपए की राशि का मीरां पुरस्कार सर्वोच्च पुरस्कार है।
बकाया पुरस्कार देने वाली पहली अकादमी:
अध्यक्ष दुलाराम सहारण ने बताया कि राजस्थान साहित्य अकादमी पहली ऐसी अकादमी है, जिसने बकाया 3 सालों के बकाया पुरस्कार देने की घोषणा की है। इसके तहत वर्ष 2019-20, वर्ष 2020-21, वर्ष 2021-22 के पुरस्कार दिए जाएंगे। जल्द ही नामों की घोषणा की जाएगी। वहीं लंबे समय से साहित्यकारों द्वारा पुरस्कारों की राशि बढ़ाने की मांग की जा रही थी, लेकिन इस पर कुछ नहीं हुुआ था। अब मुख्यमंत्री को इस संबंध में अवगत कराया है और पुरस्कारों की राशि 10 गुना बढ़ाने की मांग रखी है। इसकी जल्द ही स्वीकृति की उम्मीद है। ऐसे में 75 हजार रुपए का पुरस्कार अब 7.5 लाख का हो जाएगा। जबकि 31 हजार रुपए के पुरस्कार अब 3.1 लाख के और 21 हजार के 2.1 लाख के हो जाएंगे।
वर्तमान में ये है पुरस्कार राशि
मीरां पुरस्कार - 75000 रुपए
रांगेय राघव पुरस्कार - 31,000 रुपए
देवराज उपाध्याय पुरस्कार - 31,000 रुपए
शंभूदयाल सक्सेना पुरस्कार - 31,000 रुपए
सुमनेश जोशी पुरस्कार - 21, 000 रुपए
विभिन्न प्रांतीय अकादमियों के पुरस्कार लाखों में
वर्तमान में राजस्थान साहित्य अकादमी को छोड़ दिया जाए तो अन्य सभी प्रांतीय अकादमियों के पुरस्कार लाखों में हैं। इसमें 5 से 10 लाख रुपए तक की राशि साहित्यकारों को पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जाती है। इस राशि से साहित्यकारों व लेखकों को भी प्रोत्साहन मिलता है। वहीं, राशि भी आर्थिक रूप से संबल प्रदान करती है। ऐसे में अकादमी के पुरस्कारों की राशि में भी बढ़ोतरी होने से साहित्यकारों को और बल मिलेगा।
Published on:
11 Jul 2023 03:22 pm

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