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दो राज्यों की सीमा है या भारत-पाक सीमा है !

जमीन विवाद को लेकर चल रहा संघर्ष : 10 गांव में तनाव होते ही चल जाते हैं हथियार

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जमीन विवाद को लेकर चल रहा संघर्ष : 10 गांव में तनाव होते ही चल जाते हैं हथियार

जमीन विवाद को लेकर चल रहा संघर्ष : 10 गांव में तनाव होते ही चल जाते हैं हथियार

संदीप पुरोहित

उदयपुर. राज्य सरकार प्रशासन शहरों व गांवों के संग अभियान चलाकर जहां लोगों को पट्टे देने जा रही है, वहीं इससे पहले वनवासियों को वनाधिकार पत्र भी दे चुकी है पर राजस्थान-गुजरात की सीमा पर पिछले 64 साल से लगभग 300 काश्तकार जमीन के मालिकाना हक को लेकर लड़ रहे हैं। उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसा लगता है कि यह दो राज्यों की सीमा नहीं होकर भारत-पाक की सीमा हो।

राज्य सरकार को गुजरात सरकार से बात कर इस मामले को जल्द से जल्द निपटाना चाहिए। हर वर्ष बारिश में बुवाई के दौरान सीमा पर राजस्थान और गुजरात के किसान आमने-सामने हो जाते हैं। इनके बीच छिटपुट घटनाओं से लेकर खूनी संघर्ष तक होता रहा है । दोनों ही राज्यों की पुलिस ने हर बार पचड़े में पडऩे की बजाए अपना बचाव किया। करीब 64 साल से चल रहे इस विवाद के दौरान कई सरकारें आईं और चली गई, लेकिन सीमा विवाद का आज तक सुलटारा नहीं हो पाया। इस विवाद की आग में गुजरात सीमा से लगते राजस्थान के बाखेल, कालीकाकर, आंजणी, नयावास, गांधीशरणा, महाड़ी, राजपुर, गुरा, मंडवाल, बुढिय़ा, मामेर, भूरीढेबर गांव के लोग बरसों से सुलग रहे हैं। हर साल बरसात के बाद बुवाई को लेकर दोनों पक्षों के जमीन पर पहुंचते ही आमने-सामने की स्थिति हो जाती है।

दोनों ही राज्यों ने एक ही जमीन दे दी
सेटलमेंट के समय वर्ष 1955 में राजस्थान सरकार ने बॉर्डर से सटे गांव के लोगों के हक में जो जमीन आई वह उन्हें दे दी। इसी जमीन को 1958--59 में गुजरात ने सेटलमेंट के दौरान अपने राज्य के किसानों को दे दी। इसके बाद से ही दोनों राज्यों के किसान इस जमीन पर अपना हक जताते हुए झगड़ रहे हैं। राजस्थान के गांवों के लोगों का कहना है राजस्थान में जमीन का सेटलमेंट पहले हुआ इस कारण यह जमीन हमारी है, जबकि गुजरात के लोगों का कहना है कि यह रिकॉर्ड में हमारे नाम दर्ज है।

इतने क्षेत्र में इतनी जमीन प्रभावित

हर बार बढ़ता गया तनाव, लाठी-भाटा जंग तक हो चुकी

वर्ष 1997 में गुजरात-राजस्थान के अधिकारी ने विवाद का सुलटारा करने के लिए दोनों गांव के लोगों को पाबंद किया, लेकिन निपटारा नहीं हो पाया। 17 साल बाद 2014 में गुजरात के किसानों द्वारा विवादित जमीन पर खेती करने पर फिर विवाद उपजा। दोनों पक्षों के बीच लाठी भाटा जंग हो गई। इस घटना में कई घायल हुए। उस समय पुलिस प्रशासन ने सिर्फ मामला दर्ज किया, लेकिन आज तक निपटारा नहीं किया। उसके बाद से लगातार छिटपुट घटनाएं हो रही है।

विवादित जमीन पर मालिकाना हक को लेकर हम कई सालों से संघर्ष कर रहे हैं। खेतों में बुवाई को लेकर मारपीट और झगड़े की नौबत आ चुकी है। हम भी थक चुके हैं, बंटवारे को लेकर राजस्थान और गुजरात के अधिकारी जो भी निर्णय करेंगे वह हमें स्वीकार है।

- केशरा बुम्बडिय़ा मुखिया, ग्राम महाड़ी, वियोल

सीमा विवाद में जमीन को लेकर दोनों राज्यों के लोगों में झगडऩे के बाद मुकदमे दर्ज होते हंै, जिससे दुश्मनी कभी कभी जानलेवा भी हो जाती है। हथियारों से एक दूसरे पर हमला कर देते हैं। वर्षों बीतने के बाद अभी तक इसका समाधान नहीं होता नजर आ रहा है। विवादित जमीन पर दोनों राज्यों की सरकार जल्द फैसला करें।
- करण कुमार कांगवा, सरपंच, मंडवाल ग्राम पंचायत

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