
गुरुमुखी है भारतीय शास्त्रीय संगीत विधा : पंडित गौतम काले
उदयपुर. महाराणा कुंभा संगीत परिषद और मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय सामाजिक विज्ञान एवं मानवीकी महाविद्यालय संगीत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय निशुल्क भारतीय शास्त्रीय संगीत कार्यशाला का शुभारंभ बुधवार सुबह 11 बजे लॉ कॉलेज के सभागार में हुआ। पद्म विभूषण प्रख्यात शास्त्रीय गायक पंडित जसराज के प्रमुख शिष्य इंदौर के पंडित गौतम काले ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के घराने और गुरुमुखी संगीत विधा की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत गुरुमुखी विद्या है जो बिना गुरु के नहीं सीखी जा सकती। कार्यशाला में उन्होंनें कहा कि संगीत हमें अनुशासन देता है संगीत हर रूप में हमारे बीच में रहता है। उन्होंने कहा कि दुनिया का संगीत इन 12 स्वरों से बना है 13वां कोई स्वर नहीं है। इससे पूर्व पंडित गौतम काले, डॉक्टर प्रेम भंडारी, डॉक्टर पामिल मोदी, महाराणा कुंभा संगीत परिषद के सचिव मनोज मोरडिया, सामाजिक विज्ञान एवं मानवीकी महाविद्यालय के प्रोफेसर एवं अधिष्ठाता एसआर सुथार, लॉ कॉलेज की अधिष्ठाता डॉक्टर राजश्री चौधरी ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। पंडित गौतम काले ने भगवान श्री कृष्ण के भजन की प्रस्तुित दी। उन्होंने राग यमन की बंदिश सखी एरी आली पिया बिन मध्य लय एवं द्रुत लय में तराना गाकर कार्यशाला को गति प्रदान की। तबले पर संगत अजय राठौर व श्याम सुंदर नगर और हारमोनियम पर संगत हरिओम तिवारी ने की। कार्यशाला में संगीत जगत के कई जाने पहचाने तबला वादक पंडित रामनारायण बनावत, एडवोकेट देवेंद्र हिरण, सितार वादक नरेश वेयर, विवेक अग्रवाल उपस्थित थे। दूसरे सत्र में पंडित गौतम काले ने प्रतिभागियों को राग यमन में रचित सरगम गीत लिखने तालबद्ध और सुरबद्ध गाने का प्रशिक्षण दिया। संचालन डिंपी सुहालका ने किया।
Published on:
13 Sept 2023 10:14 pm
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