
मई के महीने में सूर्य देवता आग के गोले बरसा रहे हैं। सुबह नौ बजे बाद से शाम पांच बजे तक गर्मी मे बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है। भरी दुपहरी में पारा 41 डिग्री सेल्सियस के पार हो गया है।
बेहाल कर देने वाली इस गर्मी में एसी-कूलर भी राहत नही पहुंचा पा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि गर्मी में बिना सिर और चेहरा ढंके बाहर निकले तो चक्कर खाने की नौबत आ जाए। यह गर्मी लू के थपेड़ों से और बढ़ गई है। लोगों को अब दोपहर में बाहर निकलने में खौफ सताने लगा है और वे भूलकर भी घर से बाहर नहीं जाते।
अस्पतालों में मरीज बढ़ गए हैं। डॉक्टरों का साफ कहना है कि गर्मी में खूब पानी पीएं, दही छाछ, कैरी पानी का उपयोग खूब करें। बासी खाना नहीं खाएं नहीं तो तबीयत बिगड़ सकती है।
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मई 2016 की यह चिलचिलाती गर्मी कुछ लोगों की जान ले चुकी है। दिन के समय में शहर की सड़कें वीरान नजर आती है। गर्मी इस कदर पड़ रही है कि लोग चौराहों पर रेड सिग्नल में रूककर इंतजार करने की जहमत तक नहीं उठा रहे हैं।
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