
Talent of students being tested by taking baseline test in schools
उदयपुर. कहने को ये सरकारी कॉलेज है, लेकिन ज्यादातर के हाल किसी पुरानी स्कूल से भी बद्तर है। प्रदेश में विद्यार्थियों को घर के समीप ही बेहतर उच्च शिक्षा मुहैया हो इस उद्देश्य से सरकार ने ग्रामीण अंचलों में भी सरकारी कॉलेज खोल तो दिए, वहीं लगातार घटते छात्राओं के शिक्षा अनुपात को बेहतर करना भी बड़ा इरादा था, लेकिन इन कॉलेजों का ढांचा बरसों बाद भी मजबूत नहीं हो पाया। कुछ तो हाल में खुले हैं, जो सुविधाओं के नजरिए से कमजोर हैं। इतना ही नहीं किसी का खुद का भवन नहीं है, तो किसी में गिने चुने शिक्षक है। किसी में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है तो कोई जमीन नहीं मिलने से जहां खुलना था उस स्थान पर खुल ही नहीं पाया। पत्रिका ने जिले के ग्रामीण अंचलों के दस सरकारी कॉलेजों के हालात जाने तो पाया कि इस हाल में तो इन कॉलेजों से उच्च शिक्षा के हीरे तराशना बड़ी चुनौती साबित होगा।
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1. साइकिलों का गोदाम बना दिया जहां खुलना था कॉलेज भीण्डर. जिस स्कूल में कॉलेज खुलना था उस हिस्से को इन दिनों साइकिलों का गोदाम बना दिया है। भीण्डर के भैरव राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के आधे भवन का उपयोग इस कॉलेज के संचालन में करना तय हुआ था। यहां से साईकिलों की फिटिंग कर पूरे ब्लॉक के विद्यालयों में भेजी जा रही है। सरकार ने भीण्डर को सरकारी कॉलेज की सौगात तो दे दी, लेकिन अब तक ना तो प्रवेश शुरू हुए हैं, तो ना ही किसी भी प्रकार की अन्य शुरुआत ही हो सकी है, तो ना स्थाई भवन के ठिकाने हैं। प्रवेश समिति के अनुपम ने बताया कि विद्या संबल योजना के तहत 800 रूपये पर प्रति कक्षा के अनुसार शिक्षक को लेने की अनुमती जरूर मिली है, लेकिन अभी कॉलेज शुरू होना दूर की कोड़ी है। कानोड़, खेरोदा, भटेवर , वल्लभनगर क्षेत्र के गावो के विद्यार्थी इस कॉलेज का द्वार खुलने का इन्तजार कर रहे हैं।
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2 स्कूल में चल रहा कॉलेज: कम पड़ी रही है बैठने की जगहलसाडिय़ा. यहां का कॉलेज राजकीय महाविद्यालय महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय के भवन में चला रहे हैं। राजकीय महाविद्यालय पर 21 पद स्वीकृत है, जिसमें से वर्तमान में 1 व्याख्याता व 1 प्रिसिंपल का कार्यरत है। कॉलेज चार कक्षा-कक्षों में से 3 में चल रहा है, इसमें 500 छात्र-छात्राएॅ अध्यनरत है। कॉलेज स्टूडेंट की बैठने की जगह कम पड रही है। महाविद्यालय में धरियावद, बडीसादडी, गांवडापाल, सलुम्बर, बलीचा, आरनिया से छात्र-छात्राएॅ पढने बसों से आते है। स्टूडेंटस के लिए इसमें टॉयलेट्स तक नहीं है, पानी पीने के लिये भी बाहर जाना पडता है। कॉलेज की छत बरसात में टपकती है। यहां साफ सफाई भी नहीं है, तो टॉयलेट्स का कार्य अधूरा है।
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3 झाड़ोल कॉलेज तीन व्याख्यताओं के भरोसेझाड़ोल. झाड़ोल स्थित सरकारी कालेज में केवल तीन व्याख्याता है, तो कॉलेज परिसर में पेयजल सुविधा नहीं है। पीने के पानी के लिए वाटर कूलर है लेकिन खराब पड़े हैं। यहां ना खेल मैदान न शारीरिक शिक्षक। ऐसे में कोई खेल नहीं होता। कॉलेज में 497 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। झाड़ोल उपखंड मुख्यालय से पांच किमी दूर गोगला गांव में कॉलेज के लिए भूमि आवंटित की गई। मुख्यालय पर जमीन नहीं मिलने के कारण अब पढऩे के लिए विद्यार्थियों को वहां की राह तय करनी पड़ रही है। कॉलेज में दस कमरे हैं, लेकिन बारिश में ज्यादातर टपकते हैं। कॉलेज में विभिन्न 21 स्वीकृत पदों में केवल आठ पर कार्मिक है, 13 पद रिक्त हैं। यहां राजनीति विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र विषयों की कक्षाओं का संचालन होता है। फलासिया, बिछीवाड़ा, कोल्यारी, बाघपुरा, मादड़ी, गोराणा, देवास, नांदवेल, पानरवा, कोटड़ा सहित कई गांवों से करीब 15 से 80 किमी. कि दूरी तय कर विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते है। विद्यार्थी एनएच 58 ई पर मामाभाणेज की घाटी तिराहे पर एक किमी चलकर यहां पहुंचते हैं।
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4. बिना प्रयोगशाला के चल रहा विज्ञान संकायसलूम्बर. हाडा रानी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सलूंबर विज्ञान फैकल्टी शुरू हुए 11 वर्ष हो गये लेकिन कॉलेज में एक भी प्रयोगशाला नहीं है। कॉलेज में 2500 विद्यार्थी हैं, जिन्हें केवल सात शिक्षक पढ़ा रहे हैं। यहां कुल कक्षा कक्षों की संख्या 14 है, लेकिन 10 कक्षा कक्षों की जरूरत है। अधिकांश कमरों में बारिश में पानी टपकता है। यहां ना तो पुस्तकालय है और ना ही बेहतर खेल मैदान। 1407 छात्र एवं 1093 छात्राएं समेत 2500 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। 28 शिक्षकों के स्वीकृत शिक्षकों के पदों पर केवल 7 शिक्षक ही कार्यरत हैं, तो 21 पद रिक्त पड़े हैं। तथा पांच चतुर्थ श्रेणी में से दो कार्यरत हैं, गैर शैक्षणिक के 21 स्वीकृत पदों में से जिसमें पांच कार्मिक कार्यरत है, 16 पद रिक्त पड़े हैं,कॉलेज का परकोटा भी अधूरा है। कॉलेज का प्रवेश द्वार अवरूद्ध है, विद्यार्थियों को पीछे से आना-जाना पड़ता है, यहां धरियावद, साबला, पीठ, कुराबड ,गिंगला, बेड़ावल ,टोकर, लसाडिया, राठोडा, सराडा एवं दूरदराज क्षेत्र से अध्ययन करने के लिए छात्र छात्राएं पहुंचते हैं।
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5. 200 सीटों के बदले 975 विद्यार्थियों ने किया आवेदनसराड़ा. सराड़ा में 200 सीटों पर 975 विद्यार्थियों ने प्रवेश के लिए आवेदन किया है। यहां शैक्षणिक पद भरे हुए हैं, लेकिन लैब टेक्नीशियन, पीटीआई, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, एलडीसी सूचना अकाउंटेंट सहित अन्य पद रिक्त पड़े हैं। कॉलेज में आठ कमरे हैं, जिसमें स्टाफ रूम व पुस्तकालय भी शामिल हैं। कॉलेज भवन के बाहर सबरी गार्डन में करीब 550 से भी ज्यादा फ लदार व छायादार पौधे लगे हैं। पीने के पानी की व्यवस्था है, तो बिजली की समस्या नहीं है। प्रधानाचार्य डॉ यदु गोपाल शर्मा ने बताया कि सीटें बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। कॉलेज में 603 विद्यार्थी अध्ययनरत है।
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6. जर्जर भवन में चल रहा कॉलेजमावली. राजकीय महाविद्यालय मावली, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मावली जंक्शन के द्वितीय भवन में चल रहा है। यह पंचायत समिति मावली कार्यालय के पीछे जर्जर भवन में चल रहा है। भवन में 8 कमरे है। जिनमें 3 कार्यालय एवं 1 प्रयोगशाला कक्ष है। 4 कमरे कक्षा कक्ष है। जिनमें विद्यार्थीयों की कक्षाओं का संचालन किया जाता है। ये कमरे भी जर्जर हो रहे है। कमरे कम होने से विद्यार्थियों को बैठने में परेशानी है। अधिकांश कमरों में पानी टपकता है। हॉल की दीवारों पर दरारों से विद्यार्थियों में डर है कि कही दीवार बारिश में ढह ना जाए। 517 विद्यार्थी अध्ययनरत है। स्टाफ में 2 पद रिक्त हैं। कॉलेज के बाहरी हिस्से में गंदगी पसरी रहती है। प्रथम वर्ष में 200 बच्चों का प्रवेश हुआ है। छात्र एवं छात्रा का अनुपात बराबर है। यहां प्रतापगढ़ व लसाडिय़ा सहित उदयपुर के कई आदिवासी क्षेत्रों से भी विद्यार्थी पढऩे आते हैं। प्राचार्य सुधा जैन ने महाविद्यालय परिसर में ही स्थित राउमावि मावली के अधीन हॉल को देने की मांग की है। --------
7. कॉलेज की छत जर्जर, शौचालय के द्वार तक नहीं कोटड़ा. राजकीय महाविद्यालय कोटड़ा में कॉलेज का स्वंय का सरकारी भवन तो है, लेकिन भवन निर्माण के दौरान ठेकेदारों द्वारा घटिया सामग्री उपयोग में लेने की वजह से अधिकांश कमरों की छत क्षतिग्रस्त हो चुकी है। यहां जगह-जगह से लोहे के तार निकल चुके है। यहां कुल 7 कक्षा कक्ष है। सभी कक्षा कक्ष में छतों से बारिश का पानी टपकता है। जिससे विद्यार्थियों को बैठने में परेशानी होती है। अधिकांश दीवारें जर्जर हो चुकी है। शौचालय के दरवाजे एवं खिड़कियां नही हैं। खिलाडिय़ों के लिए महाविद्यालय में खेल का मैदान नही है। भवन की खिड़कियां जगह जगह से टूट चुकी है। भवन दूर से खडंहर जैसा लगता है। उदयपुर से कोटड़ा सवा सौ किमी दूर है, ऐसे में कर्मचारी यहां काम करने के लिए तैयार नहीं। कॉलेज में प्राचार्य का पद एक साल से रिक्त है। कॉलेज में व्याख्याताओं के 2 पद रिक्त है। गैर शैक्षणिक 11 पद रिक्त हैं। सन 2021 में प्रथम वर्ष में 200 छात्र छात्राओं का नवीन प्रवेश हुआ है, कुल 529 छात्र छात्राओं पर पांच शिक्षक कार्यरत हैं। मांडवा, मामेर, मेरपुर, पानरवा, बिकरणी, जुड़ा आदि क्षेत्र जो कि महाविद्यालय से 30 से 35 किमी दूरी पर स्थित है। जहाँ से छात्र छात्राएं साईकिल ,बस या टैक्सी में खुद का किराया ख़र्च कर पढऩे के लिए आते है। महाविद्यालय में छात्रावास की सुविधा नहीं होने की वजह से कई विद्यार्थी किराए पर कमरे लेकर पढ़ाई कर रहे है।
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8. ऋ षभदेव में 21 में से 20 पद खालीऋषभदेव. ऋ षभदेव उपखण्ड़ के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के पुराने भवन में संचालित कॉलेज सत्र 2021 में राज्य सरकार द्वारा प्रारम्भ शुरू किया गया। लेकिन विभाग द्वारा स्वीकृत 21 पद स्वीकृत होने के बाद भी 20 पद रिक्त है। केवल कॉलेज में स्थाई रूप से 1 शिक्षक ही कार्यरत है। विभाग के द्वारा गेस्ट फेकल्टी पर 3 शिक्षकों को अस्थायी रूप से एक माह पूर्व लगाया गया है। कॉलेज सत्र 2021 में खुलने से वर्तमान में शिक्षा विभाग के राजकीय उप्रावि में महाविद्यालय को किराये पर आंवटित किया गया है। कॉलेज में 200 छात्र-छात्रा अध्ययनरत है। जहां महाविद्यालय संचालित है उस भवन में वर्तमान में 7 कमरें शिक्षा विभाग द्वारा किराये पर कॉलेज को आंवटित किये गये है। यहां प्रथम वर्ष कला वर्ग ही संचालित है। भवन उच्च प्राथमिक विद्यालय का होने से बैठक व्यवस्था कॉलेज नियमानुसार नहीं है। पानी,बिजली की व्यवस्था होने के बाद भी भवन छोटा होने से साफ- सफ ाई नहीं है। ऋ षभदेव क्षेत्र के लगभग 40 किलोमीटर दूर से बच्चे पढऩे आते हैं। कार्यवाहक प्राचार्य रणजीत मीणा का कहना है कि रिक्त पदों की सूचना आगे दी है, 3 अन्य कार्मिकों को अस्थायी रूप से शिक्षण व्यवस्था में लगाया है।
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9 खेरवाडा कन्या कॉलेज: 52 में से 45 पद रिक्तनयागांव. राज्य सरकार ने खेरवाड़ा में दो-दो कॉलेज खोल दिये मगर विभाग के द्वारा पद नहीं भरे जाने से कॉलेज छात्राओं को भविष्य अन्धकार में हैं। छात्र व आचार्य शिक्षा व्यवस्था सही नहीं होने को लेकर चिन्तित है। राजकीय कन्या महाविद्यालय में 18 में से 13 पद शैक्षिक व 34 में से 32 पद अशैक्षिक के होकर कुल 52 में से 32 कर्मचारीयों के पद स्वीकृत होने के बाद भी रिक्त है। कॉलेज भवन छोटा होने से कक्षाओ का संचालन में परेशानी आ रही है, शिक्षण व्यवस्था सहीं नहीं चल रही। कॉलेज की दीवारों पर दरारे आ रही हैं। जहां कक्षाएं चल रही है, वहां का भवन जर्जर है। कॉलेज में 750 छात्राएं पढ़ती हैं। कॉलेज में पांच कक्षा कक्षों की जरूरत है। महाविद्यालय में पुस्ताकलय,खेल कक्ष,संगीत कक्ष कमरों की भी कमी होने से पुस्तकालय, खेल कक्ष, संगीत कक्ष तीनों एक ही कमरों में चल रहे हैं। बैठक व्यवस्था सही नहीं होने से टेबल कुर्सी दिनभर एक कमरे से दूसरे कमरे में ले जाने पड़ते है। यहां राणी बोर्डर, झांझरी बोर्डर,सागवाड़ा पाल, कल्याणपुर, बिछीवाड़ा, मगरा के कुछ गांवों से करीब 50 से 60 किलोमीटर दूर से छात्राएं पढऩे आती है। मुख्य बाजार से कॉलेज दूर होने से बालिकाओं को बाजार पार कर लगभग 2 से 2.50 किलोमीटर चल कर आना पडता है। यहां इन्टरनेट नहीं चलता, तो खेल मैदान नहीं है। कार्यवाहक प्राचार्य प्रवीण पंड्या ने बताया कि रिक्त पदों से समस्या आ रही है।
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10. खेरवाडा बॉयज कॉलेज में 22 स्वीकृत में से 13 रिक्त नयागांव. खेरवाडा उपखण्ड़ के बंजारिया कोर्ट परिसर के पास बनी राजकीय बॉयज कॉलेज में शैक्षिक 22 स्वीकृत पद में से 13 पद रिक्त होने से शिक्षण व्यवस्था सुचारू नहीं चल पाती है। प्राचार्य रेखा पंचोली ने बताया कि गैस्ट फैकल्टी के 6 शिक्षकों की अस्थायी नियुक्ति की है। कॉलेज में 1350 विद्यार्थी अध्ययनरत है। शारीरिक शिक्षक नहीं है। कॉलेज खेरवाडा से लगभग 3 किलोमीटर दूर हैं। यहां चलने वाले प्राइवेट वाहनधारी मनमाना किराया लेते हैं। जिससे बच्चों को आर्थिक भार सहना पडता है। कॉलेज में छात्रों के अनुपात में शिक्षक के अलावा कोई बडी समस्या नहीं है। भवन भी प्रर्याप्त होने से शिक्षण कार्य में कोई कमी नहीं रहती है। कॉलेज में दूर दुराज लगभग 50 से 60 किलोमीटर दूर से भी बच्चे अध्ययन करने को आते है।
Published on:
05 Dec 2021 10:29 am
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