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जज, आईएएस, आईपीएस बन गए बिना कोचिंग के ही, बस इरादे मजबूत हो

अगर आप टारगेट और हार्डवर्क के साथ पढ़ाई-लिखाई करते हैं तो आप कभी पीछे रहने वाले नहीं हैं, आप चाहे जो सोच लें वह सक्सेस आपको जरूर मिलेगी।

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मुकेश हिंगड़

चुरू के जिला कलक्टर बनाए IAS siddarth sihag सिद्धार्थ सिहाग का लेकसिटी उदयपुर से बड़ा नाता रहा है। वे 2015 से 2018 तक उदयपुर नगर निगम के आयुक्त रहे और वे उदयपुर स्मार्ट सिटी कंपनी के सीइओ भी रहे। उस समय प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारियां करने वाले विद्यार्थियों को उन्होंने टिप्स दिए थे। स्वयं सिहाग आज जहां है वहां तक पहुंचने का उनका सफर भी अपने आप में जीवन में कई नई राह दिखाता है। सिहाग की पढाई और फिर आईएएस तक का सफर युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। इनकी मंजिल थी कि मैं आईएएस ऑफिसर बनकर समाज की सेवा करूं। इस पथ के सफर से पहले इन्हें न्यायिक सेवा का रास्ता मिला और फिर पुलिस सेवा में आए लेकिन मंजिल तो भारतीय प्रशासनिक सेवा ही थी, यही जुनून था जिसे वे पूरा करकर रहे। उस समय उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश आपके लिए। आइएएस और आरएएस या अन्य प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारियां करने वाले विद्यार्थियों को सिहाग के जूननु को जरूर पढ़ना चाहिए।

टारगेट और हार्डवर्क के साथ जरूर मिलेगी सक्सेस
'अगर आप टारगेट और हार्डवर्क के साथ पढ़ाई-लिखाई करते हैं तो आप कभी पीछे रहने वाले नहीं हैं, आप चाहे जो सोच लें वह सक्सेस आपको जरूर मिलेगी। कॉलेज में आने के बाद ठाना था कि प्रशासनिक अधिकारी ही बनना है, इसके लिए बहुत मेहनत की। मैं स्कूलिंग के बाद पंचकुला से सीधे हैदराबाद गया।

देहली के सिविल जज मेट्रोपोलियन मजिस्ट्रेट में चयन

देहली ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा पास करने के बाद देहली के सिविल जज मेट्रोपोलियन मजिस्ट्रेट पर चयन हो गया। ट्रेनिंग कर ही रहा था कि आईएएस का परिणाम आ गया और 148वीं रैंक मिली। मुझे ऐसे में आईपीएस कैडर मिला और मैं नेशनल पुलिस एकेडमी हैदराबाद गया।

आईपीएस की ट्रेनिंग
आईपीएस की ट्रेनिंग के साथ ही आईएएस बनने का सपना नहीं छोड़ा और उसकी तैयारी भी जारी रखी। आईएएस की परीक्षा पूरी तैयारी के साथ दी और मुझे 148 से सीधे 42वीं रैंक मिली। इसके लिए मैंने कोई कोचिंग नहीं की। अलबत्ता 10 घंटे नियमित रूप से पढ़ाई जरूर की।

तीनों ही कॉम्पीटिशन के लिए कोचिंग नहीं की
तीनों ही कॉम्पीटिशन के लिए कोचिंग नहीं की। आईएएस की तैयारी के दौरान इंटरनेट से पुराने आईएएस के अनुभव जरूर लिए। वर्धा के तत्कालीन कलक्टर के ब्लॉग से भी नोट मददगार रहे और बाकी पूरा फोकस पढ़ाई पर। उस समय दो ऑप्शनल पेपर होते थे और तब भी बहुत टफ पेपर होते थे। आज के दौर में सामान्य ज्ञान पर पूरा फोकस होना चाहिए।

एक परिचय सिहाग का
हरियाणा के हिसार के छोटे से गांव सिवानी बोलान के है और उनकी पूरी पढ़ाई पंचकुला में ही हुई है। सिहाग की पत्नी रूकमणि सिहाग भी आईएएस है अभी वे चुरू कलक्टर लगे है। सिद्धार्थ के पिता दिलबाग सिंह हरियाणा में चीफ टाउन प्लानर के पद से रिटायर्ड हुए तो उनका भाई सिद्धांत भी जज है।

सिद्धार्थ सिहाग के टिप्स
- नियमित पढ़ाई का तय शिड्यूल रखें
- अफवाहों से दूर रहे
- अपनी कैपेबिलिटी पर भरोसा रखे
- दो साल तैयारी करें, फिर अटेम्प्ट देंगे ऐसा नहीं करें
- हर अटेम्प्ट जरूर दें
- इन्टरनेट से भी अपडेट रहे
- मॉक इंटरव्यू जरूर साझा करें।
- जीके से अपडेट रहें
- आंसर को बैलेंस रखे
- आत्मविश्वास कभी नहीं खोएं

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