
1440 नमूनों की जांच
भुवनेश पंड्या
उदयपुर. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च(आइसीएमआर ) ने प्लाज्मा थैरेपी को रोक दिया है। यानी ये संदेश जारी किया गया है कि प्लाज्मा थैरेपी कोरोना के उपचार में किसी भी प्रकार से कारगर नहीं है। एेसे में अब तक उदयपुर में जो प्लाज्मा डोनेशन हुए या चढ़ाए गए उसका कोई मतलब नहीं निकलता। अब तक उदयपुर में करीब 357 प्लाज्मा डोनेशन हुए हैं तो 690 प्लाज्मा चढ़ाए गए हैं। ये सारी कवायद किसी काम नहीं आई। गत 18 मई को आईसीएमआर ने इसे लेकर आदेश जारी किए।
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प्लाज्मा के लिए दौड़ भाग भी खूब
कोरोना की पहली लहर में जब तेजी से संक्रमण बढ़ा तो एमबी हॉस्पिटल में पूरे प्रयास कर प्लाज्मा बैंक की शुरुआत की गई। इसके बाद यहां लगातार कई प्लाज्मा डोनर्स आगे आए और लोगों को सहयोग करने के लिए उन्होंने प्लाज्मा दान किया। खास बात ये है कि तमाम प्रयासों पर तब फुल स्टॉप लग गया। एमबी हॉस्पिटल में अब प्लाज्मा थैरेपी को बंद कर दिया गया है।
- प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी खूब प्लाज्मा चढ़ाए गए और डोनर्स आगे आए।
- विशेषज्ञ चिकित्सक के अनुसार आईसीएमआर की ओर से जारी निर्देशों के बाद ये स्पष्ट हुआ कि थ्योरी में तो एेसे संक्रमण में इसे उपचार के लिए महत्वपूर्ण और फायदेमंद बताया जाता है, लेकिन प्रायोगिक में ये सिस्टम काम नहीं आ पाया।
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सरकारी के लिए था नि:शुल्क, प्राइवेट में भर्ती मरीजों से ली थी राशि
प्लाज्मा चढ़ाने के लिए बकायदा सरकार ने आदेश जारी किए थे, जो कोरोना संक्रमित मरीज सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती है, उसे प्लाज्मा नि:शुल्क चढ़ाया गया, जबकि जो प्राइवेट में उपचार करवा रहे थे उनसे राशि ली गई। इसमें पहले शुल्क १६५०० था, जबकि बाद में इसका शुल्क दस हजार रुपए प्राइवेट वाले मरीजों के लिए किया गया था।
मनाही पर किया है बंद
आईसीएमआर के निर्देश के बाद प्लाज्मा थैरेपी बंद की गई है। शुरुआत में इसे कोरोना उपचार में लाभकारी समझते हुए शुरू करवाया गया था, लेकिन अब इसकी मनाही पर बंद किया गया है।
डॉ. आरएल सुमन, अधीक्षक, एमबी हॉस्पिटल, उदयपुर
Published on:
27 Jun 2021 08:37 am
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