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नशीली दवाओं का अवैध कारोबार: डीआरआई ने चाही आरोपितों की अभिरक्षा

तीन हजार करोड़ रुपए की नशीली गोलियों के अवैध कारोबार के मामले में केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क की राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की टीम ने जांच में सामने आए नए तथ्यों के बारे में मुख्य आरोपित सुभाष दूदानी व उसके भतीजे रवि की पांच दिन की हिरासत मांगी है

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सतना

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Madhulika Singh

Mar 07, 2017

तीन हजार करोड़ रुपए की नशीली गोलियों के अवैध कारोबार के मामले में केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क की राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की टीम ने जांच में सामने आए नए तथ्यों के बारे में मुख्य आरोपित सुभाष दूदानी व उसके भतीजे रवि की पांच दिन की हिरासत मांगी है। मामले में न्यायालय ने अगली पेशी 9 मार्च तय की है। दिल्ली की एक फर्म में भागीदारी से विमुक्त होने संबंधी दस्तावेज के मामले में भी न्यायालय में सुनवाई हुई, जिस पर आरोपितों ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे आरोपित सुभाष दूदानी, उसके भतीजे रवि व निर्मल उर्फ टीनू दूदानी, अनिल मलकानी, मुंबई निवासी परमेश्वर व्यास,अतुल महात्रे व वड़ोदरा निवासी संजय पटेल को सोमवार शाम 4.30 बजे न्यायालय में पेश किया गया।

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डीआरआई के पास नहीं ठोस आधार

डीआरआई की ओर से पेश आरोपित सुभाष व रवि दूदानी की अभिरक्षा संबंधी आवेदन पर मुंबई से आए अधिवक्ता ए.के. मिश्रा ने विरोध करते हुए कहा कि अभिरक्षा में लेने का डीआरआई के पास कोई ठोस आधार नहीं है। भारतीय दप्रसं में आरोपित को 15 दिन से ज्यादा हिरासत में नहीं रखा सकता है। यह अवधि काफी हो चुकी है। डीआरआई के अधिवक्ता प्रवीण खंडेलवाल व राजेश वसीटा ने न्यायालय को बताया कि डीआरआई ने पूर्व में आरोपितों का महज पांच दिन का ही रिमांड लिया था। अभी दस दिन का रिमांड और लिया जा सकता है। खंडेलवाल ने सुप्रीम कोर्ट के राजकुमार अरवालका बनाम यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का निर्णय पेश करते हुए कहा कि 15 दिन का रिमांड का प्रावधान पुलिस पर लागू होता है। डीआरआई को पुलिस से पूरी तरह से पृथक माना गया है। राजस्थान हाईकोर्ट के जज पंकज भंडारी ने भी आरोपित परमेश्वर व्यास की याचिका में इसका उल्लेख किया है। खंडेलवाल ने कहा कि टीम ने उदयपुर में जिस परिसर से मैथाकुलॉन टेबलेट्स बरामद की, उस परिसर व गोदामों के पूर्व मालिकों एवं अन्य व्यक्तियों ने बयानों में आरोपितों के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से डेटा में भी कई तथ्य सामने आए है जिनके बारे में पूछताछ आवश्यक है।

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हस्ताक्षर करने से किया इनकार

दिल्ली की फर्म से साझेदारी तोडऩे के लिए न्यायालय ने आरोपित सुभाष व परमेश्वर व्यास से हस्ताक्षर के लिए कहा तो उन्होंने एेसा करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि हस्ताक्षर के लिए किसी पर दबाव नहीं बनाया जा सकता। दिल्ली के अधिवक्ता ने न्यायालय में बताया कि सुभाष दूदानी व परमेश्वर व्यास पूर्व में दिल्ली की सिवास ट्रेडिंग कॉपरेशन फर्म में पार्टनर थे। दोनों ने फर्म से 30 सितम्बर 2016 को अलग होकर पार्टनरशिप से विड्रो किया। फर्म के कागजों पर दूदानी व व्यास के हस्ताक्षर करवाने हैं कि विड्रो तारीख के बाद से इस फर्म में उनका किसी तरह का दायित्व नहीं है। अब किसी तरह की गतिविधियां फर्म अपने स्तर पर करेगी।

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