
NCERT Books
उदयपुर. सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और नामांकन बढ़ाने की दिशा में चाहे जितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। विद्यार्थियों के लिए निशुल्क पाठ्यपुस्तकें जून में ही नोडल केन्द्रों को दे दी गई ताकि वे अपने अधीनस्थ स्कूलों में पहुंचा दें लेकिन अब तक बच्चों को ये किताबें मिली ही नहीं। किताबें नहीं होने से जुलाई का पहला सप्ताह बिना पढ़ाई के ही बीत गया। बच्चे स्कूल में दूध और पोषाहार का आनंद लेकर ही घर लौट रहे हैं। पत्रिका जहां पहुंची, वहां भी अधूरी, कुछ छात्रों के पास पुरानी किताबें ने सोमवार को कुछ स्कूलों को टटोला तो यह सामने आई कि अधिकतर नोडल केन्द्र किताबें दबाकर बैठे हैं, जहां कहीं ये बंटी तो वह भी आधी-अधूरी।
केस-01
एक भी किताब नहीं मिली
आयड़ स्थित पंडित खेमराज राजकीय उप्रावि में 124 विद्यार्थियों का नामांकन है लेकिन एक भी बच्चे को किताबें नहीं मिली है। सोमवार को 91 बच्चे स्कूल पहुंचे। कार्यवाहक प्रधानाध्यापक मंजू कोठारी ने बताया कि नोडल केन्द्र सुंदरवास स्कूल ने अब तक किताबें नहीं दी है।
केस-02
पुरानी किताबें, वे भी आधी
महासतिया स्थित राजकीय बालिका उमावि में 200 छात्राएं पढ़ती हैं। गत वर्ष की पुरानी किताबें कुछ छात्राओं को दी गई हैं लेकिन नई किताब एक भी नहीं पहुंची। प्रधानाचार्य रुचिका माहेश्वरी के अनुसार नोडल केन्द्र पुरोहितों की मादड़ी है, जहां से फोन आया कि मंगलवार को किताबें दे देंगे।
गर्मी की छुट्टियों में नि:शुल्क पुस्तकें सभी स्कूल में पहुंच जानी चाहिए थी, जो हुआ नहीं। अब पढ़ाई शुरू होने के समय आधी-अधूरी किताबों से बच्चों और अभिभावकों के सामने शिक्षकों को शर्मिंदा होना पड़ रहा है।
शेरसिंह चौहान — व. उपाध्यक्ष, राजस्थान पंचायती राज एवं कर्मचारी संघ
जो किताबें पहुंच गई, वे नोडल केन्द्र पर वितरित हो जानी चाहिए थी। तुरंत ही सभी सीबीईओ को मैसेज करवाता हूं कि पीईईओ को पाबंद कर किताबों का वितरण कर रिपोर्ट दें।
भरत जोशी — जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय
Published on:
09 Jul 2019 12:49 pm

बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
