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उदयपुर के वीर चक्र विजेता दुर्गाशंकर के शौर्य काे सेना ने दिया सम्मान, पुणे में बने एनसीओ भवन और सड़क मार्ग का नामकरण

नॉन कमीशनिंग ऑफिसर आर्मी भवन और मार्ग का नाम देने से बढ़ा डीएस पालीवाल व उदयपुर का गौरव, कार्यक्रम में आर्मी चीफ मनोज पाण्डे ने किया सम्मान

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वीर चक्र विजेता 87 वर्षीय दुर्गाशंकर पालीवाल भारतीय रेलवे के वही पायलट हैं, जो 1971 में अकेले ही पाकिस्तान के खोखरापार स्टेशन से नया छोर में बैठी भारतीय टुकड़ी के लिए गोला-बारूद से भरी ट्रेन लेकर चले गए थे। उनके सम्मान में भारतीय सेना की ओर से पुणे में डीएस पालीवाल नॉन कमीशनिंग ऑफिसर आर्मी भवन बनाया है। साथ ही आर्मी म्यूज़ियम के सामने वाली रोड को वीर चक्र दुर्गाशंकर पालीवाल का नाम दिया गया है। ये पल ना केवल उनके लिए बल्कि पूरे उदयपुर और प्रदेश के लिए भी गौरवान्वित करने वाले रहे।

आर्मी चीफ ने सुपर गोल्डन जुबली कार्यक्रम में किया सम्मान

कार्यक्रम में गए दुर्गाशंकर पालीवाल ने बताया कि आर्मी की बाॅम्बे क्राॅप्स ऑफ सेफर्स रेजिमेंट के 100 वर्ष पूरे होने पर सुपर गोल्डन जुबली कार्यक्रम 30 जनवरी से 1 फरवरी तक पुणे में हुआ। इसमें आर्मी चीफ मनोज पाण्डे के मुख्य आतिथ्य में उन्हें विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मानित किया गया। आर्मी चीफ ने पालीवाल के शौर्य का उल्लेख किया। सेना ने उनके सम्मान में नॉन कमीशंड ऑफिसर्स प्रशिक्षण भवन तैयार किया है, यह देखकर उनको बहुत गर्व महसूस हुआ। साथ ही सड़क मार्ग भी उनके नाम पर होने से उनका नाम हमेशा याद रखा जाएगा।

25 बोगियों वाली ट्रेन लेकर पाकिस्तानी सीमा में किया था प्रवेश

भारतीय रेल की ओर से हवलदार व रेल चालक दुर्गाशंकर पालीवाल को 25 बोगियों वाली एक ट्रेन लेकर पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश करना था। दुर्गाशंकर बारूद से भरी हुई ट्रेन लेकर पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए। तब ट्रेन को पाकिस्तानी विमानाें ने घेर लिया था। अपने जांबाज हौसलों से उन्होंने अकेले ही इन लड़ाकू विमान पर अपनी मशीन गन से गोलियां दागी व उस विमान को हवा में ही नष्ट कर दिया। यदि वे ये कारनामा नहीं करते तो भारत की ट्रेन, जो गोला बारूद से लदी थी वो नष्ट हो जाती और न जाने युद्ध और कितने दिन चलता। युद्ध 3 से 16 दिसम्बर 1971 तक चला व 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया।