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बदनाम जेल : बैरकों में पहुंच रहे मोबाइल और नशा, जेल प्रशासन पाक साफ !

- हर बार जेलों में मिल रहे हैंडसेट, सिम व आपत्तिजनक सामग्री - रिपोर्ट में जेल प्रशासन ने खुद के कपडे़ बचाए

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Search in Jail : जेल में मिले मोबाइल, चार्जन, सिम और अफीम

Search in Jail : जेल में मिले मोबाइल, चार्जन, सिम और अफीम

भुवनेश पंड्या

प्रदेश की जेलों से बदनामी के दाग धुल नहीं रहे। भले ही अपराधी जेलों में बंद हैं, लेकिन इन सींखचों के पीछे भी अपराध फल-फूल रहा है। जेलों में सरेआम नशा परोसा जा रहा है, वहीं मोबाइल हैण्डसैट, सिम व अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिलना आम बात है। इतना ही नहीं जेलों में अब हथियार भी मिल रहे हैं। सरकार ने जेलों के निरीक्षण वरिष्ठ अधिकारियों से करवाना शुरू किया तो पूरी पोल खुलकर सामने आ गई। उदयपुर में बुधवार को जेल में निरीक्षण के दौरान मादक पदार्थ व मोबाइल मिलने के बाद पत्रिका ने पड़ताल की तो पता चला कि प्रदेश में बीते दो वर्ष में हुए निरीक्षणों में कमोबेश ऐसे ही बदतर हाल मिले। खास बात यह है कि जेलों में पहुंच रही आपत्तिजनक सामग्री को लेकर जेल प्रशासन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा।

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रेकॉर्ड में ये बताए कारण :1. आसपास उंची इमारतों के कारण आसानी से निषिद्ध वस्तुओं को कारागृहों में फेंक दिया जाता है।

2. कारागृहों की दीवार (मेनवाल) से निषिद्ध सामग्री बंदियों के परिजनों, साथियों द्वारा अन्दर फेंकी जाती है।3. कारागृहों के अन्दर प्रतिदिन बंदी, सामान की आवक-जावक होती है।

4. कई अवसरों पर सुरक्षा उपकरण भी निषिद्ध सामग्री को पकडने में सफल नहीं होते हैं।5. बंदी पेशियों पर कारागृह से बाहर जाते हैं एवं बाद पेशी वापस कारागृह पर आते हैं।

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आपत्तिजनक सामग्री के मिलने की घटनाओं को रोकने के लिए ये किया :

1. जिला पुलिस एवं जेल प्रशासन द्वारा समय-समय पर संयुक्त रूप से कारागृहों की तलाशी ली जा रही है।

2. कारागृह प्रभारियों द्वारा कारागृहों की नियमित रूप से तलाशी ली जा रही है।

3. तलाशी के लिए आधुनिक उपकरणों को क्रय किया जाकर, उनका उपयोग किया जा रहा है।

4. आपत्तिजनक सामग्री पहुंचाने पर कार्मिकों की मिलीभगत पाए जाने पर उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।

5. जिन बंदियों के पास से निषिद्ध सामग्री बरामद होती है, उनके विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाती है। साथ ही उन्हें नियमानुसार दण्डित किया जाता है।6. बंदियों को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।

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प्रदेश की जेलों के निरीक्षणों में ऐसे खुली कलई

- वर्ष 2020-21 में हुए निरीक्षणों में केन्द्रीय कारागृह जयपुर में 14 मोबाइल फोन, इयर फोन, चार्जर, चार्जिंग लीड, नशे की सामग्री मिली। अलवर में 18 मोबाइल मिले थे। झुन्झुनूं में बैरकों से सिगरेट के पैकेज, नशे की सामग्री मिली। खेतड़ी, नीम का थाना में भी कमोबेश इसी तरह की सामग्री मिली। उदयपुर में मोबाइल, गांजा व अन्य तम्बाकू उत्पाद मिले थे। बांसवाड़ा जेल में मोबाइल व चार्जर मिले। प्रतापगढ़ में 15 से ज्यादा मोबाइल, तम्बाकू उत्पाद सहित आश्चर्यजनक तौर पर मोटरसाइकिल तक मिली थी।- चित्तौड़गढ़, भरतपुर, निम्बाहेडा, डीग, अजमेर, भीलवाड़ा, जोधपुर, बाडमेर, जैसलमेर, पाली, बीकानेर, श्री गंगानगर, चूरू, सूरतगढ़, हनुमानगढ, कोटा व बारां जिलों की जेलों में भी ऐसे ही हाल थे।

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सरकार ने पहले जैमर लगाए थे, लेकिन जैमर तकनीकी रूप से सफल नहीं हो पाए, अब ऐसी तकनीक ला रहे हैं, जिससे ये सब रोका जा सके। स्टाफ की इच्छा शक्ति भी मायने रखती है। पूरा सुरक्षा स्टाफ जरूरी है, अधिकांश जेलों में स्टाफ करीब 60 फीसदी ही रह गया है। विभाग कई प्रयास कर रहा है, राजस्थान के अधिकांश जेलों में बैगेज स्कैनर खरीदे हैं, सभी जेलों में अपडेटेड मेटल डिटेक्टर खरीदे गए हैं। ऐसे उपकरण खरीदे गए हैं, जो जमीन के अंदर गहराई तक धंसा हुआ हो उसका भी पता चल सके। जेल की बाहरी सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत करनी जरूरी है।

कैलाश त्रिवेदी, डीआईजी रेंज, केन्द्रीय कारागृह उदयपुर, अजमेर, कोटा

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