
नन्हा सा कीड़ा बनाता है सुहाग की निशानी 'लाख की चूड़ी'
पंकज वैष्णव/उदयपुर . राजस्थान की परंपरा अनुसार लाख चूड़े के बिना शादी नहीं होती। लाख का इस्तेमाल शृंगार सामग्री ही नहीं, बल्कि हेण्डीक्राफ्ट सामग्री, फर्नीचर पॉलिश सहित अनेकों जगह होता है, लेकिन लाख का उत्पादन कैसे होता है, अमूमन लोग नहीं जानते। दरअसल लाख एक प्रकार के कीड़े की देन है, जो कई तरह के पेड़ों पर पाया जाता है। विलुप्त हो रहे लाख कीड़ों का संरक्षण करने का काम शुरू हो गया है। राजस्थान में पानी की कमी वाले क्षेत्र और आदिवासी अंचल में विशेष प्रजाति के पेड़ों से लाख उत्पादन की काफी संभावनाएं जताई गई है।
भारत लाख का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला देश है। कुछ राज्यों में लाख पैदा होती है, लेकिन सर्वाधिक खपत राजस्थान में ही होती है। वजह पर्यटन की दृष्टि से हेण्डीक्राफ्ट उत्पाद और पॉलिश फर्नीचर की अधिक डिमाण्ड होना है। राजस्थान में सुहाग के लिए लाख की चूडिय़ां पहनने की परंपरा की वजह से भी यहां खपत अधिक है। केंद्र सरकार की ओर से आईसीएआर नेटवर्क परियोजना के तहत लाख कीट अनुवंशिक संसाधन संरक्षण केंद्र महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) में पांच साल पहले शुरू किया गया। केंद्र की ओर से किए गए सर्वे में सामने आया कि राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दादर नगर हवेली (केंद्र शासित प्रदेश) में लाख उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं। यहां ऐसी प्रजाति के पेड़ हैं, जिन पर लाख कीट आसानी से पनप कर अधिक मात्रा में लाख उत्पादन दे सकते हैं।
चार राज्यों का अनुसंधान केंद्र उदयपुर में
आईसीएआर नेटवर्क परियोजना के तहत लाख कीट अनुवंशिक संसाधन संरक्षण केंद्र एमपीयूएटी में वर्ष 2015 में शुरू हुआ। इसके तहत बीते दो सालों से हुए सर्वे के नतीजे सामने आने लगे हैं। पाया गया कि चारों राज्यों में ऐसी कई तरह की वनस्पति है, जिन पर लाख के कीट ज्यादा पनप सकते हैं। यहां विलुप्त हो रहे लाख कीड़े को बचाया जा सकता है। आमतौर पर दो तरह की लाख (रंगीनी और कुसुमी) होती है। चारों राज्यों के समूह में रंगीनी लाख पैदा करने वाले कीड़े ही देखे गए हैं।
लाख कीट वाले पेड़ों की जियो टेगिंग
एमपीयूएटी के कीट विज्ञान विभाग में स्थित लाख कीट अनुवंशिक संसाधन संरक्षण केंद्र की ओर से चार राज्यों में सर्वे में वनस्पति को चिह्नित करने के साथ ही जियो टेगिंग की गई है। चारों राज्यों के करीब 800 किसानों को लाख उत्पादन का प्रशिक्षण भी दिया गया है।
भारत से 70 प्रतिशत एक्सपोर्ट
एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत लाख उत्पादन में अग्रणी है। यहां सालाना 18 से 20 हजार टन पैदावार होती है, जिसमें से 65-70 प्रतिशत एक्सपोर्ट किया जाता है। जिससे देश को 400 से 500 करोड़ की आमदनी होती है। अमरीका, यूरोपियन देश, बांग्लादेश, सऊदी अरब, नेपाल, श्रीलंका आदि में लाख निर्यात की जाती है। देश में भी झारखण्ड, छत्तीसगढ़ में 70 प्रतिशत उत्पादन होता है। बाकी 35 प्रतिशत महाराष्ट्र, ओड़ीशा, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, मेघालय, असम करते हैं। देश की कुल 35 प्रतिशत खपत में से करीब 18 प्रतिशत खपत अकेले राजस्थान में होती है।
फल-सब्जियों की कोटिंग भी
फलों, सब्जियों पर ताजगी बनाए रखने में लाख का इस्तेमाल होने लगा है। पहले मोम की कोटिंग ही होती थी, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होती है। ऐसे में अब लाख की कोटिंग का चलन बढ़ गया है। यह सेहत के लिए नुकसानदायक होती।
लाख का इतिहास सदियों पुराना
भारत में लाख का इस्तेमाल सदियों से होता रहा है। महाभारत काल में भी लाक्षागृह का उल्लेख होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि करीब 50 साल पहले तक देश में कई हिस्सों में लाख की खेती होती थी। बदलते दौर में लाख को भुला दिया गया। अभी पूर्वी प्रदेशों में ही खेती हो रही है, जबकि राजस्थान, गुजरात, हरियाणा में भी बेहद संभावनाएं हैं। सर्वाधिक खपत वाला राज्य होने से राजस्थान में पैदावार होने पर रोजगार के अवसर काफी बढ़ सकते हैं।
रोजगार के बढ़ेंगे अवसर
लाख के कीट खत्म ना हो जाए, इसलिए अनुसंधान हो रहा है। अनुसंधान में पाया गया है कि राजस्थान, गुजरात, हरियाणा में कीट विलुप्त नहीं हुए, जिंदा हैं, इन्हें बढ़ाने की जरुरत है। संरक्षण किया जाना चाहिए। सर्वाधिक लाभ राजस्थान को मिलने वाला है, क्योंकि सर्वाधिक खपत भी यहीं होती है। किसानों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
केके शर्मा, डायरेक्टर, आईएनआरजी, रांची
लाख से बचेगी परंपरा
लाख का उत्पादन झारखण्ड, बिहार में होता है, लेकिन खपत राजस्थान में अधिक है। अनुसंधान में यहां पौधे चिह्नित किए गए है। मेवाड़ में प्रमुखता से पाए जाने वाले बेर के पेड़ पर लाख कीट का जीवन बेहतर पाया गया है। लाख कीट को बचाना महज एक खेती नहीं, बल्कि परंपरा का संरक्षण है, जो सदियों से भारत में चली आ रही है।
अभय कुमार मेहता, डायरेक्टर रिसर्च, एमपीयूएटी
सर्वे के बेहतर परिणाम
हमारे यहां केंद्र पर उन तमाम तरह के पौधों का रोपण किया गया है, जिन पर लाख कीट पनपते हैं। प्रयोगशाला में लाख के उत्पादन से लेकर उपयोग तक की प्रक्रिया बताई गई है। ये किसानों, विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने में काफी कारगर साबित हो रहा है। केंद्र के सर्वे में बेहतर परिणाम आए हैं। किसानों की आमदनी और लाख का इस्तेमाल बढ़ेगा।
हेमन्त स्वामी, प्रभारी, लाख कीट अनुवंशिक संसाधन संरक्षण केंद्र, एमपीयूएटी
Published on:
11 Dec 2019 06:15 pm
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