
उदयपुर . सोशल मीडिया के जरिए अफवाहों का बाजार गर्म नहीं रहे और शहर में कानून व्यवस्था नहीं बिगड़े इसके लिए इन्टरनेट सेवा बंद कर देना शांति व्यवस्था के लिए ठीक है लेकिन इससे पूरे शहर का कारोबार, रोजगार , पब्लिक यूटिलिटी और आम जनता की समस्याएं कितनी बढ़ जाती है इस पर भी तो चिंता करनी चाहिए। भारत सरकार डिजिटल क्रांति की बात कर रही है लेकिन पूरा डिजिटल प्लेटफॉर्म ही नेटबंदी से थमा हुआ है।
सरकार को ऐसे स्थिति में सिर्फ सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म को ब्लॉक करने के लिए कोई कदम उठाने चाहिए न कि सब जगह इन्टरनेट सेवा बंद करनी चाहिए। उदयपुर शहर में नेटबंदी के दो दिन पूरे के बाद से पूरा व्यापार जगत और डिजिटल से जुड़े रोजगार के केन्द्र ठप पड़े हैं। सब परेशान हैं। जिले भर में करीब 1500 ई-मित्र बंद हैं जिस पर आने वाले सारे काम रुके पड़े हैं। बिजली, पानी, टेलीफोन के बिल जमा नहीं हो रहे हैं, ई-मित्र पर भामाशाह व आधार के काम रुके पड़े हैं। सबसे बड़ी तकलीफ उनको हुई जिनको नौकरी में ज्वाइन व पासपोर्ट बनाने के लिए ऑनलाइन पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करानी थी, आखिर वे दूसरे जिले में जाकर अपना काम करवा कर आए हैं।
नेटबंदी से सरकारी दफ्तरों में काम रुका हुआ है, जीएसटी के दायरे में आए व्यापारी परेशान है। पेटोल पंप पर पेट्रोल-डीजल भराने वालों को कार्ड की बजाय नकदी देनी पड़ रही है, डिजिटल के दौर में जो भी नए विकल्प सामने आए सब बंद पड़े हैं। अग्रिम आयकर भुगतान की अंतिम तिथि निकल गई है, कई स्कूलों में होने वाले ऑनलाइन एक्जाम नहीं हो पाए और ई-मित्र संचालकों की शनिवार को होने वाली परीक्षा नहीं हो सकी, जिले भर से ई-मित्र संचालक परीक्षा को लेकर चिंतित थे क्या होगा, अब परीक्षा की नई तारीख तय होगी।
Published on:
16 Dec 2017 05:46 pm
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