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चंद्रयान-3 टीम में राजस्थान की बेटी नेहा भी शामिल, रोवर से मिली तस्वीरों का करेंगी अध्ययन

Chandrayaan-3 Landing Successful: चंद्रयान-3 ने चांद पर सफलतापूर्वक लैंडिंग कर के ना केवल इतिहास रचा बल्कि पूरी दुनिया में भारत का मान बढ़ा दिया।

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नेहा अपने पिता और मां के साथ

पत्रिका न्यूज नेटवर्क/उदयपुर। Chandrayaan-3 Landing Successful: चंद्रयान-3 ने चांद पर सफलतापूर्वक लैंडिंग कर के ना केवल इतिहास रचा बल्कि पूरी दुनिया में भारत का मान बढ़ा दिया। चांद पर तिरंगा लहराने का श्रेय भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के हर एक सदस्य को जाता है, जिन्होंने सालों से दिन-रात एक करके मिशन को पूरा किया।

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मिशन में उदयपुर की बेटी नेहा गौड़ भी अहम भागीदारी निभा रही है, जो इसरो के अहमदाबाद केंद्र से टीम के साथ योगदान दे रही है। नेहा पिछले 18 सालों से इसरो में है। पहले वे इसरो के बेंगलूरू कार्यालय में कार्यरत थीं, इसके बाद वे इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद आ गईं। यहां वे सीनियर साइंटिस्ट व प्रोजेक्ट मैनेजर के बतौर काम कर रही है।

बचपन से ही टॉपर, राष्ट्र सेवा का जुनून: गौड़ ने बताया कि नेहा बचपन से ही टॉपर रही है। जुनून था और देश के लिए सेवा करे। इसलिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस में चयन होने के बावजूद नेहा ने इसरो में काम करना चुना। नेहा की स्कूलिंग सरकारी स्कूल धरियावद और गुरूनानक स्कूल से हुई तो बीएन से बीएससी फर्स्ट इयर किया। इसके बाद कोटा से इंजीनियरिंग की। बिना कोचिंग के टॉपर रही। इसके बाद टीसीएस और इसरो के लिए आवेदन किया, जिसमें इसरो की परीक्षा में ऑल इंडिया छठी रैंक बनी। टीसीएस में भी अच्छे पैकेज पर चयन हुआ, लेेकिन देश सेवा के लिए इसरो से जुड़ीं।

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बेटी और इसरो पर नाज: सेक्टर-5 निवासी नेहा के माता-पिता के लिए ये पल यादगार और गौरवपूर्ण थे, क्योंकि उनकी बेटी भी इस मिशन से जुड़ी हुई है। नेहा के पिता मोहनलाल गौड़ अलसीगढ़ के सरकारी स्कूल में प्राचार्य पद से रिटायर्ड हुए हैं, वहीं मां आराधना शुक्ला भी राजसमंद में देलवाड़ा के सरकारी स्कूल से प्राचार्य थीं। उन्होंने बताया कि बेटी का काम रोवर लैंडिंग के बाद मिल रहे फोटो का अध्ययन करना है। इसके अलावा भी वे कई अपकमिंग प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बेटी के साथ इसरो टीम पर भी नाज है।