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video : कंगना उदयपुर के खजुराहो से हिमाचल ले गई मां जगत अंबिका की ज्योत, बनवाया मंदिर

- अभिनेत्री देवी को मानती है अपनी कुलदेवी- हिमाचल में पैतृक धबोई गांव में बनवाया मंदिर

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video : कंगना उदयपुर के खजुराहो से हिमाचल ले गई मां जगत अंबिका की ज्योत, बनवाया मंदिर

मधुल‍िका स‍िंंह/धीरेंद्र जोशी. उदयपुर . अभिनेत्री कंगना रणौत शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर जगत कस्बे की मां अंबिका को अपनी कुलदेवी मानती हैं। वे गत नवरात्र में यहां से ज्योत लेकर हिमाचल गई। उन्होंने मंडी के पास अपने पैतृक गांव धबोई में मंदिर बनवाकर प्राण प्रतिष्ठा करवाई। इसमें उदयपुर के आचार्य अल्केश पण्ड्या के नेतृत्व में 11 पंडितों की टीम ने गत दिनों शास्त्रोक्त विधि से मंदिर में कुलदेवी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करवाई।

पण्ड्या ने बताया कि कंगना गत वर्ष अक्टूबर में मेवाड़ के खजुराहो कहे जाने वाले जगत के अम्बिका प्रासाद में मंदिर आई थीं और पूजा-पाठ करवाया था। वे देवी अम्बिका को अपनी कुलदेवी मानती है। बाद में उन्होंने धबोई में कुलदेवी मंदिर के निर्माण का निर्णय किया। उन्होंने ही वहां विधि-विधान से शिलान्यास करवाया। इस मंदिर का निर्माण उदयपुर के ही अशोक जैन ने करवाया। कंगना ने आचार्य अल्केश को प्रशस्ति पत्र भेंट किया तो उन्होंने कंगना को महाराणा प्रताप की प्रतिमा भेंट की। इस मौके पर कंगना के दादा ब्रह्मदास, पिता अमरदीप, माता आशा रणौत, भाई अक्षत, बहन रंगोली और मामा किशोर वर्मा सहित अन्य परिजन भी मौजूद रहे।

मां के सपने को किया पूरा
कंगना ने अपनी मां आशा रणौत के सपने को पूरा किया है। दरअसल, कंगना की मां आशा रणौत को वर्षों से स्वप्न में कन्या दिखाई देती थी। ब्राह्मणों के पास जाकर पता किया तो उन्होंने इसे कुलदेवी बताया। परिजनों को अपनी कुलदेवी का पता नहीं था, क्योंकि करीब डेढ़ सौ साल पहले कंगना के पूर्वज राजस्थान से मंडी आकर बस गए थे। मां ने बेटी को कुलदेवी का मंदिर ढूंढने का जिम्मा सौंपा। इसी तलाश में कंगना उदयपुर के जगत गांव पहुंची, जहां पर देवी अंबिका का 1200 साल पुराना मंदिर है। बाद में कंगना ने अपनी मां के सपने को पूरा करने का कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने देवी अंबिका के साथ भगवान शिव का मंदिर भी बनवाया गया है।

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राजस्थान के लाल पत्थर से बना है मंदिर

पं. अल्पेश ने बताया कि धबोई गांव में लाल पत्थर से मंदिर बनवाया गया है। खास बात यह है कि मंदिर निर्माण में न तो कोई कील लगी है और न ही हथौड़े का इस्तेमाल किया गया है।