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कुंभलगढ़ टाइगर रिर्जव के लिए सबकी हामी, रिपोर्ट पर उदयपुर में किया मंथन

टीम भविष्य को लेकर चर्चा की, कई सुझावों की सूची तैयार की

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एनटीसीए की एक्सपर्ट कमेटी टीम दो दिन पहले कुंभलगढ़ में

एनटीसीए की एक्सपर्ट कमेटी टीम दो दिन पहले कुंभलगढ़ में

मुकेश हिंगड़
उदयपुर. मेवाड़ के लिए सुकून देने वाली खबर है कि कुंभलगढ़ अभयारण्य को टाइगर रिर्जव घोषित करने के लिए टीम की हामी ही है पर अभी पेपर वर्क से लेकर रिपोर्ट तैयार करने का काम विस्तार से होगा। कुंभलगढ़ नेशनल पार्क का दौरा करने के बाद उदयपुर आई टीम के सदस्यों ने रविवार को यहां फतहसागर झील किनारे अरण्य कुटीर में कुंभलगढ़ को लेकर मंथन-चिंतन किया। टीम ने चुनौतियों और समाधान को लेकर भी चर्चा की तो कई सुझाव भी आए। टीम के दौरें और फीडबैक से यह तो साफ है कि यह क्षेत्र टाइगर के लिए मुफीद है लेकिन अभी प्रक्रिया में समय लगेगा।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की टीम के सदस्यों एनटीसीएटीम में आइएफएसएन आरएन महरोत्रा, एनके वासू, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट टाइगर सेल के वैज्ञनिक डॉ. कौशिक बनर्जी, एनटीसीए के रीजनल ऑफिसर हेमंत कामडे एवं अयान साधु आदि ने चर्चा की। कुंभलगढ़ भ्रमण को बिन्दुवार तैयार किया और अरण्य कुटीर में स्थानीय अधिकारियों के साथ चर्चा की। सदस्यों को सबसे ज्यादा एक तो इस क्षेत्र में टाइगर के भोजन को लेकर तमाम बिन्दुओं पर चर्चा की, इसके साथ ही मानचित्र के जरिए इस क्षेत्र के विस्तार की संभावनाओं को भी जाना-समझा। वन विभाग की ओर से मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) आर.के. खेरवा व राजसमंद डीएफओ फतहसिंह राठौड़ ने तथ्यों के साथ जानकारी रखी।

वैसे टीम ने कुंभलगढ़ में तो यह भरोसा दिलाया कि यहां टाइगर के लिए उपयुक्त वातावरण है, लेकिन यह भी कहा कि वे इस कार्य को जल्दी में नहीं करेंगे। सदस्यों का मानना है कि टाइगर रिजर्व के लिए पूरी बन रही है लेकिन प्रोजेक्ट सफल हो इसके लिए अभी ज्यादा मेहनत करनी होगी इसलिए बिन्दुवार जो भी चुनौतियां है अभी से उन पर मंथन किया जा रहा है। टीम को इस रिपोर्ट बनाने के बाद जो भी जरूरत और होगी उसकी भी अलग से जरूरत पड़ी तो सर्वे की जाएगी।