
उदयपुर . महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय में एक्स-रे सुविधा का ढर्रा चरमरा रहा है। नियमित रेडियोग्राफर की कमी से जूझ रहे चिकित्सालय में मरीजों की जिंदगी का ‘दर्द’ नौसिखिए हाथों में उलझ गया है। सरकारी उपेक्षा से आपातकालीन वार्ड सहित अन्य जगहों पर संचालित एक्स-रे मशीनों पर विद्यार्थी सेवाएं दे रहे हैं। लापरवाही के कारण एक बार में सही एक्स-रे नहीं होने से मरीजों को दो-दो, तीन-तीन बार एक्स-रे विकिरणों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को भी चिकित्सालय में कुछ ऐसी ही खामियों भरी लापरवाही मरीजों के लिए दु:खदायी बनी रही। कतार में खड़े मरीजों को आपातकालीन वार्ड में नौसिखिया प्रशिक्षु सेवाएं देता रहा, जबकि नियमित रेडियोग्राफर समीप टेबल पर बैठकर रजिस्टर में व्यस्त दिखाई दिया। खामियों पर सवाल करने के दौरान नियमित कर्मचारी सजग होकर ड्यूटी तो करने लगा, लेकिन जवाब देने से बचता भी रहा।
ओपीडी समय में इमरजेंसी सेवाएं
हुआ यूं कि सोमवार को ट्रोमा एक्स-रे मशीन तकनीकी कारणों के चलते ओपीडी समय में कुछ घंटों के लिए बंद थी। इस बीच व्यवस्था सुचारू रखने के लिए इमरजेंसी इकाई की एक्स-रे मशीन की दोपहर 1 से 3 बजे तक सेवाएं ली गई। इस बीच रेडियोग्राफर दूसरे कामों में व्यस्त रहा, जबकि कुछ महीनों पहले ही डीआरटी (डिप्लोमा इन टेक्नोलॉजी) में दाखिल हुआ विद्यार्थी मरीजों के एक्स-रे कार्य करता रहा। इतना ही नहीं एक्स-रे कक्ष के बाहर मरीजों की कतार लगी रही और खुले दरवाजों के बीच एक्स-रे जारी रहा। सवाल-जवाब के बीच रेडियोग्राफर ने उसकी जिम्मेदारी संभालते हुए व्यर्थ खड़े लोगों को कक्ष के बाहर किया और कार्य में जुट गया। यहां प्रतिदिन सात से आठ सौ एक्स-रे होते हैं। इसी तरह सोनोग्राफी मशीन भी ज्यादातर नौसिखियों के भरोसे ही रहती है।
उपस्थिति है अनिवार्य
रेडियोग्राफर की उपस्थिति में डीआरटी विद्यार्थियों को एक्स-रे करने की अनिवार्यता है। वरिष्ठता के हिसाब से रेडियोग्राफर उसके अनुभव एवं तकनीकी जानकारी से विद्यार्थी को अवगत कराता है। नियमित कार्मिकों की कमी से कार्य में कुछ दिक्कतें आ रही हैं।
ओम शर्मा, प्रभारी, रेडियोग्राफर, एमबी हॉस्पिटल
Published on:
28 Nov 2017 04:11 pm
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